अंतरिक्ष में इसरो की एक और सफलता के मायने

सवाल यह है कि इसरो की इस सफलता का देश की सैन्य रणनीति और अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा? क्या भारतीय एजेंसी अंतरिक्ष बाजार में अपनी अहम भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुकी है? क्या विश्व के तमाम देश उपग्रह प्रक्षेपण के लिए इसरो की सहायता लेंगे? क्या कार्टोसैट-3 प्राकृतिक आपदाओं और आतंकवादी गतिविधियों की सटीक जानकारी उपलब्ध कराने में सफल होगा?

Sanjay Sharma

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पीएसएलवी-सी47 रॉकेट के जरिए कार्टोसैट-3 उपग्रह को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। इसके अलावा अमेरिका के 13 अन्य व्यावसायिक नैनो उपग्रहों को भी पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया। मिशन चंद्रयान-2 के बाद यह इसरो का बड़ा मिशन था। सवाल यह है कि इसरो की इस सफलता का देश की सैन्य रणनीति और अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा? क्या भारतीय एजेंसी अंतरिक्ष बाजार में अपनी अहम भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हो चुकी है? क्या विश्व के तमाम देश उपग्रह प्रक्षेपण के लिए इसरो की सहायता लेंगे? क्या कार्टोसैट-3 प्राकृतिक आपदाओं और आतंकवादी गतिविधियों की सटीक जानकारी उपलब्ध कराने में सफल होगा? क्या इससे भारत की सैन्य क्षमता और मजबूत होगी?
इसरो लगातार सफलता की सीढिय़ां चढ़ रहा है। कार्टोसैट-3 सैन्य उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रेक्षपण इसी का नतीजा है। इसमें दो राय नहीं है कि इस उपग्रह के जरिए अब भारत दुश्मन देशों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रख पाएगा। उपग्रह का कैमरा इतना ताकतवर है कि यह आसमान से जमीन पर होने वाली छोटी से छोटी हलचल को पकड़ लेगा। उदाहरण के तौर पर यह कैमरा 509 किमी की ऊंचाई से जमीन पर चल रहे आदमी की कलाई में बंधी घड़ी से सटीक टाइम बता देगा। जाहिर है जब भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे कुटिल देशों से घिरा हो तो यह उपग्रह बेहद जरूरी था। यह न केवल सेना की मारक क्षमता को अत्यधिक बढ़ा देगा बल्कि दुश्मन पर सटीक हमला करने का रास्ता भी खोल देगा। भारतीय सेनाएं आतंकी गतिविधियों पर बाज जैसी नजर रखने में सफल होंगी। वहीं कार्टोसैट-3 के जरिए प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में भी आसानी हो जाएगी। इसकी मदद से इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग, कोस्टल जमीन का इस्तेमाल और नियमन, सडक़ों के नेटवर्क को मॉनिटर करने, भौगोलिक स्थितियों में आते बदलाव की पहचान करने जैसे काम आसान हो जाएंगे। इसरो की यह सफलता अंतरिक्ष बाजार में भारत की अहमियत को बढ़ा रही है। उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की सफलता के कारण इसरो की मांग अंतरिक्ष बाजार में तेजी से बढ़ी है। यही वजह है कि अमेरिका समेत विश्व के तमाम देश अपने उपग्रहों को प्रक्षेपित करने के लिए इसरो की मदद ले रहे हैं। इसकी मुख्य वजह प्रक्षेपण की कीमत काफी कम और इसरो की सफलता अन्य देशों की अंतरिक्ष एजेंसी से बेहतर होना है। अंतरिक्ष बाजार में इसरो की बढ़ती मांग भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी। कुल मिलाकर इसरो की सफलता न केवल ऐतिहासिक है बल्कि देश के लिए कल्याणकारी भी है।

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