ग्राहकों की जेब ढीली करने की तैयारी में दूरसंचार कंपनियां

जियो ने शुरुआत में अपने ग्राहकों को एक लिमिटेड रिचार्ज पर किसी भी नेटवर्क पर मुफ्त बात करने की सुविधा देकर सबको उस प्लान के तहत ग्राहकों को लाभ देने के लिए मजबूर कर दिया था। लेकिन उसी कंपनी ने अब जियो के अलावा अन्य नेटवर्क पर कॉल करने पर 6 पैसे प्रति मिनट की दर से वसूलना शुरू कर दिया है।

Sanjay Sharma

भारत संचार निगम लिमिटेड, वोडाफोन, आइडिया समेत अनेकों दूरसंचार कंपनियां घाटा झेल रही हैं। ये सभी कंपनियां आने वाले समय में अपना घाटा दूर करने के लिए ग्राहकों की जेब ढीली करने का संकेत दे चुकी हैं। जियो ने शुरुआत में अपने ग्राहकों को एक लिमिटेड रिचार्ज पर किसी भी नेटवर्क पर मुफ्त बात करने की सुविधा देकर सबको उस प्लान के तहत ग्राहकों को लाभ देने के लिए मजबूर कर दिया था। लेकिन उसी कंपनी ने अब जियो के अलावा अन्य नेटवर्क पर कॉल करने पर 6 पैसे प्रति मिनट की दर से वसूलना शुरू कर दिया है। यह सुविधा 1 दिसंबर से 12 पैसे प्रतिमिनट में तब्दील हो जाएगी। जाहिर है अन्य कंपनियां भी कुछ ऐसा ही करने का प्लान लागू करेंगी।
मोबाइल फोन आज लोगों की सबसे बड़ी जरूरत बन चुके हैं। दूरसंचार सेवा प्रदाता कंपनियों के बीच जबर्दस्त होड़ मची है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माना भरने का दबाव और बना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने एअरटेल, वोडाफोन-आइडिया और दूसरी दूरसंचार सेवाप्रदाता कंपनियों को बानवे हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का बकाया और लाइसेंस फीस केंद्र सरकार को देने को कहा है। इतना ही नहीं, यह बकाया रकम जमा कराने के लिए सिर्फ तीन महीने का वक्त दिया गया है। इसलिए दूरसंचार विभाग ने भारती एअरटेल, वोडाफोन-आइडिया, आर कॉम और अन्य कंपनियों पर कुल लगभग एक लाख तैंतीस हजार करोड़ के बकाया का दावा किया है जिसमें बानवे हजार करोड़ रुपए लाइसेंस शुल्क और इकतालीस हजार करोड़ रुपए स्पैक्ट्रम शुल्क के बकाया हैं। इसलिए अब कंपनियों के सामने अपना बिजनेस समेटने और कर्ज चुकाने के लिए ग्राहकों की जेब पर बोझ डालने के अलावा कोई और विकल्प नजर नहीं आ रहा है। ऐसी संभावना व्यक्त की गई है कि आने वाले समय में कॉल दरें महंगी होंगी और रिचार्ज पैकेज भी महंगे होंगे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद निजी दूरसंचार कंपनियों के हाथ-पैर फूले हुए हैं। इसलिए कंपनियां सारा बोझ ग्राहकों पर डालेंगी। सबसे ज्यादा संकट एअरटेल और वोडाफोन-आइडिया पर है। इसीलिए इन कंपनियों ने सबसे पहले शुल्क बढ़ाने के संकेत दिए हैं। जो ग्राहकों के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। वहीं यह भी तय है कि अगर कंपनियां इस तरह के संकट को नहीं झेल पाती हैं तो बाजार में इक्का-दुक्का कंपनियों का एकछत्र राज्य हो सकता है और फिर ये कंपनियां ग्राहकों को नचा सकती हैं। देश में एक अरब से ज्यादा लोग मोबाइल सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में अगर मोबाइल सेवाएं महंगी होती हैं तो यह ग्राहकों के लिए बड़ी मार होगी, वह भी तब जब मंदी से लोगों की कमर टूट रही है।

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