एनजीटी के आरओ पर बैन के निहितार्थ

हमने प्रकृति से न्यूनतम जरूरत का पानी लेने की अपनी संस्कृति को त्याग दिया है। जल स्तर बढ़ाने और बारिश के पानी को सहेजने का काम भी सिर्फ कागजों में ही दिखता है। इसलिए कई जगहों पर लोग एक-एक बाल्टी पीनी के लिए तरस रहे हैं, तो कहीं पानी की कमी से खेती तक नहीं हो पा रही है। बारिश का पानी नदी-नालों में बह जाता है और हम जमीन में पानी ढूंढते रह जाते हैं।

sanjay sharma

विश्व समुदाय के सामने पर्यावरण संरक्षण बहुत बड़ी चुनौती है। इंसान अपने लाभ के लिए प्राकृतिक शक्तियों का भरपूर दोहन कर रहा है। जो कहीं न कहीं इंसान के लिए ही खतरा बनती जा रही हैं। हम लगातार पानी का दोहन कर रहे हैं। हमने पानी के बड़े-बड़े संयंत्र लगा लिए हैं। जो एक लीटर पानी स्वच्छ करने में उसका कई गुना पानी बर्बाद करता है। वही पानी 20 रुपये लीटर बोतल में भरकर बेचा जाता है। घरों में लगा वाटर प्यूरिफायर और आरओ भी साफ पानी के मुकाबले तीन गुना पानी बर्बाद करता है। यह अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि जल संकट से जूझ रही दुनिया को जल संरक्षण की जरूरत है। ऐसे में आरओ पर बैन लगाया जाना उचित है,लेकिन हमें पानी तो स्वच्छ चाहिए। ऐसे में हम आरओ के अन्य विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
हम वैश्विक युग में कई वर्षों से जमीन का सीना चीरकर फैक्ट्री से निकलने वाला कचरा और गंदगी सीधे जमीन में डाल रहे हैं। यह धरती से निकलने वाले गंदे और हानिकारक पानी की मूल वजह है। इसी वजह से नेशन ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी)को जल संरक्षण के लिए आरओ पर बैन लगाने जैसा सख्त कदम उठाना पड़ा। इसे सुप्रीम कोर्ट ने भी उचित ठहराया है। क्योंकि जब पूरी दुनिया जल संरक्षण के ठोस उपाय तलाशने में व्यस्त है। हम साफ पानी निकालने के चक्कर में रोजाना लाखों करोड़ों लीटर पानी यूं ही बर्बाद कर दे रहे हैं। आरओ से निकलने वाला हजारों लीटर गंदा पानी नाली में बेकार बहाते हैं। हमने प्रकृति से न्यूनतम जरूरत का पानी लेने की अपनी संस्कृति को त्याग दिया है। जल स्तर बढ़ाने और बारिश के पानी को सहेजने का काम भी सिर्फ कागजों में ही दिखता है। इसलिए कई जगहों पर लोग एक-एक बाल्टी पीनी के लिए तरस रहे हैं, तो कहीं पानी की कमी से खेती तक नहीं हो पा रही है। बारिश का पानी नदी-नालों में बह जाता है और हम जमीन में पानी ढूंढते रह जाते हैं। लोग पानी के लिए जान के दुश्मन हुए जा रहे हैं। फिलहाल हमें स्थानीय पारंपरकि जलस्रोतों को संरक्षित करने, बरसाती पानी का अधिक उपयोग करने, नदी-नालों के छोटे बांध और तालाब बनाने में दिलचस्पी दिखानी होगी। हमें नई पीढ़ी के लोगों को पानी के सोर्स और उनके महत्व की जानकारी देनी होगी। मसलन, पानी कहां जाता है, बरसाती पानी को कैसे सहेजें, नदी-तालाब खत्म होने के दुष्परिणामों, पानी के मनमाने दोहन के दुष्परिणामों की भी जानकारी होनी चाहिए। हमें इन मुद्दों पर समझ बढ़ानी होगी। अपनी दिन चर्या में जल संरक्षण को शामिल करना होगा। तभी इस संकट का निदान संभव हो पाएगा।

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