प्रदेश को टीबी मुक्त करने की कवायद तेज खोजे जा रहे मरीज

  • अभी तक चार लाख मरीजों को किया जा सका है चिन्हित
  • 80 फीसदी मरीज फेफड़ों की टीबी से मिले पीडि़त
  • तम्बाकू सेवन और प्रदूषण के कारण बढ़़ा रोग

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। प्रदेश को टीबी मुक्त करने की कवायद तेज हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने पिछले डेढ़ साल में चार लाख टीबी के मरीजों को चिन्हित किया है। हालांकि टीम का मानना है कि करीब तीन लाख टीबी के और मरीज मिल सकते हैं। इन मरीजों में 80 फीसदी मरीज फेफड़ों की टीबी से ग्रस्त मिले हैं। चिकित्सकों के मुताबिक तम्बाकू सेवन और प्रदूषण के कारण यह रोग तेजी से बढ़ा है।
प्रदेश में टीबी के रोगियों को चिन्हित कर उन्हें इलाज उपलब्ध कराने का अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान पिछले वर्ष शुरू किया गया था। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम को कुल चार लाख मरीज टीबी से ग्रसित मिले हैं। इन मरीजों में जांच के बाद टीबी की पुष्टिï हुई है। सरकार की योजना के मुताबिक इन मरीजों को सरकारी अस्पतालों से इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही रोगियों को पौष्टिïक आहार मिले, इसके लिए सरकार की ओर से दी जाने वाली आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करायी जा रही है। गौरतलब है कि जागरूकता के अभाव में लोगों को रोग के बारे में पता नहीं चल पाता है। लिहाजा सरकार की ओर से टीबी रोगियों को खोजने का अभियान चलाया गया है। प्रदेश में करीब सात लाख टीबी के मरीज हैं। चिकित्सकों के अनुसार यदि टीबी का समय पर इलाज नहीं किया गया तो यह जानलेवा साबित होता है। पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर यूनिट के डॉ. वेद प्रकाश का कहना है कि पल्मोनरी टीबी से हटकर भी टीबी के और मरीज हैं। शरीर के दूसरे अंगों में भी टीबी का रोग फैल रहा है। टीबी के छिपे मरीज काफी लापरवाही बरत रहे हैं।

क्या है टीबी
टीबी (क्षय रोग) एक घातक संक्रामक रोग है जो माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस जीवाणु की वजह से होती है। टीबी आम तौर पर फेफड़ों पर हमला करता है, लेकिन यह फेफड़ों के अलावा शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता हैं।

दिया जा रहा पोषण भत्ता
प्रत्येक टीबी रोगी को 500 रूपये प्रतिमाह पोषण भत्ता दिया जा रहा है। अभी तक यूपी में 75 करोड़ से अधिक रुपये टीबी रोगियों के खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से जारी किए गए हैं।

नया कानून
भारत सरकार के नये नियम के अनुसार अब नए मेडिकल कॉलेज को तभी मान्यता मिलेगी जब वहां टीबी की नि:शुल्क जांच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी।

महिलाएं भी प्रभावित
टीबी से महिलाएं भी प्रभावित हो रही हैं। चिकित्सकों का कहना है कि करीब10 प्रतिशत महिलाएं बच्चेदानी में टीबी से पीडि़त हैं। जागरूकता के अभाव में वे इसकी पहचान नहीं कर पा रही हैं।

टीबी मुक्त लखनऊ अभियान शुरू किया गया है। रोगियों की पहचान तेजी से हो रही है। केजीएमयू ने अभी तक 31 टीबी ग्रस्त बच्चों को गोद लिया है। रिकार्ड के मुताबिक प्रदेश में चार लाख मरीजों को चिन्हित किया गया है। उनका इलाज चल रहा है।
-डॉ. सूर्यकांत, पाल्मोनरी विभाग, केजीएमयू

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