प्रदूषित पेयजल खतरे की घंटी

सवाल यह है कि प्रदूषित पानी की आपूर्ति के लिए कौन जिम्मेदार है? पानी के शोधन के नाम पर जारी हो रहा बजट कहां जा रहा है? जलकल विभाग क्या कर रहा है? पानी की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? लगातार पानी की जांच क्यों नहीं की जा रही है? क्या सरकार को व्यवस्था बदलने की जरूरत
नहीं है?

Sanjay Sharma

प्रदेश की राजधानी लखनऊ में लोगों को शुद्ध पेयजल तक नसीब नहीं हो रहा है। जांच में पेयजल के अस्सी नमूने फेल हो चुके हैं। जांच में पेयजल में खतरनाक वैक्टीरिया के मिलने की पुष्टिï हो चुकी है। प्रदूषित पेयजल के सेवन से लोगों की सेहत को खतरा उत्पन्न हो गया है। सवाल यह है कि प्रदूषित पानी की आपूर्ति के लिए कौन जिम्मेदार है? पानी के शोधन के नाम पर जारी हो रहा बजट कहां जा रहा है? जलकल विभाग क्या कर रहा है? पानी की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? लगातार पानी की जांच क्यों नहीं की जा रही है? क्या सरकार को व्यवस्था बदलने की जरूरत नहीं है?
सिर्फ लखनऊ ही नहीं बल्कि प्रदेश के तमाम शहरों में प्रदूषित पेयजल की समस्या विकराल होती जा रही है। यहां प्रदूषित गोमती नदी का 200 एमएलडी पानी ऐशबाग और 100 एमएलडी पानी बालागंज जलकल को जाता है। हालांकि इस पानी को कई प्रक्रियाओं के जरिए संशोधित किया जाता है, बावजूद इसके पानी की गुणवत्ता ठीक नहीं है। सीवर युक्त पानी की आपूर्ति आम समस्या बन चुकी है। हजरतगंज, इंदिरानगर, फैजुल्लागंज, डालीबाग, बादशाहनगर, निशातगंज, गोलगंज, राजभवन कॉलोनी समेत तमाम स्थानों से लिए गए पेयजल के नमूने जांच के फेल हो चुके हैं। पेयजल के ये नमूने खुद जलकल और स्वास्थ्य विभाग ने लिए हैं। हजरतगंज में लिए गए पानी के नमूने से कॉलीफॉर्म जैसे घातक बैक्टीरिया मिलने की पुष्टिï हुई है। यह सेहत के लिहाज से बेहद खतरनाक है। दूषित पानी पीने से पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं। यही नहीं व्यक्ति हेपेटाइटिस जैसी बीमारी की चपेट में आ सकता है। जब राजधानी का यह हाल है तो प्रदेश के दूसरे शहरों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। यह स्थिति तब है जब शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए पूरा विभाग काम कर रहा है और इसके लिए सरकार हर साल भारी-भरकम बजट आवंटित करती है। बावजूद इसके लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। आलम यह है कि पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए ओटी टेस्ट के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। सरकार को चाहिए कि पानी की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए ठोस रणनीति बनाए और इस मामले में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करे। इसके अलावा ओटी टेस्ट लगातार होने चाहिए ताकि पेयजल की शुद्धता को बरकरार रखा जा सके। साथ ही शहरों में शोधन संयंत्रों की क्षमता और संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो प्रदेशवासियों को प्रदूषित पानी की आपूर्ति होती रहेगी। यह स्थिति लोगों की सेहत के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं है।

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