बेहतर यातायात की चुनौती और प्रदूषण

सवाल यह है कि इस नयी चुनौती से कैसे निपटा जा सकता है? क्या सडक़ों पर वाहनों को कम करने के लिए एक बेहतर और सुविधाजनक यातायात व्यवस्था को लागू करने की जरूरत है? क्या सार्वजनिक वाहनों और मेट्रो रेल सेवा में वृद्धि कर वातावरण में फैल रहे जहरीले प्रदूषण को रोका जा सकता है? क्या आम आदमी की जागरूकता और सहयोग के बिना यातायात की नई चुनौती से निपटा जा सकता है?

Sanjay Sharma

देश में बढ़ती आबादी के साथ निजी वाहनों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। ये वाहन सडक़ों पर न केवल जाम जैसी स्थिति उत्पन्न करते हैं बल्कि वातावरण को भी प्रदूषित करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इसका लोगों की सेहत पर खराब असर पड़ रहा है। सवाल यह है कि इस नयी चुनौती से कैसे निपटा जा सकता है? क्या सडक़ों पर वाहनों को कम करने के लिए एक बेहतर और सुविधाजनक यातायात व्यवस्था को लागू करने की जरूरत है? क्या सार्वजनिक वाहनों और मेट्रो रेल सेवा में वृद्धि कर वातावरण में फैल रहे जहरीले प्रदूषण को रोका जा सकता है? क्या आम आदमी की जागरूकता और सहयोग के बिना यातायात की नई चुनौती से निपटा जा सकता है? क्या सरकार को इस ओर पहल करने की जरूरत नहीं है?
पिछले कुछ वर्षो से वातावरण में फैल रहा प्रदूषण बड़ी समस्या बन चुका है। दिल्ली और यूपी समेत कई राज्य इसकी चपेट में हैं। दिल्ली गैस चेंबर में तब्दील हो गई है तो यूपी के गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा समेत लखनऊ की हवा भी खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो चुकी है। यहां का एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार खराब होता जा रहा है। दरअसल, वातावरण एक दिन में प्रदूषित नहीं हुआ है। इसके लिए कुछ तत्कालीन और कुछ दीर्घकालीन कारण जिम्मेदार हैं। शहरों में बढ़ती आबादी और समृद्धि के चलते निजी वाहनों की कतार रोज बढ़ती जा रही है। यूपी की राजधानी लखनऊ में ही लाखों निजी गाडिय़ां सडक़ों पर दौड़ रही हैं। सार्वजनिक साधनों के इस्तेमाल की प्रवृत्ति लगातार कम हो रही है। सडक़ों पर दौड़ रही ये गाडिय़ां जाम जैसी स्थिति उत्पन्न करती हैं। इन गाडिय़ों से निकलने वाला धुआं सीधे वातावरण में घुल कर हवा को प्रदूषित कर रहा है। वर्षों पुरानी डीजल गाडिय़ां फर्राटा भर रही हैं। ये वातावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचा रही हैं। लिहाजा जैसे ही किसान पलारी जलाना शुरू करते हैं, हवा पूरी तरह जहरीली हो जाती है। जाहिर है यदि वातावरण को शुद्ध करना है तो सरकार और आम जनता दोनों को यातायात की वर्तमान व्यवस्था में तत्काल परिवर्तन करना होगा। सरकार को प्रदूषणरहित सार्वजनिक वाहनों की संख्या में वृद्धि और मेट्रो सेवाओं का विस्तार करना होगा। साथ ही लोगों को इन वाहनों का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने के लिए जागरूक भी करना होगा। दूसरी ओर आम आदमी को निजी वाहनों को लेकर शेयरिंग सिस्टम विकसित करना होगा ताकि एक निजी वाहन से अधिक से अधिक लोग अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच सकें। यदि ऐसा नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में प्रदूषण जानलेवा साबित होगा।

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