अस्पतालों के रैन बसेरे बदहाल, ठंड से ठिठुर रहे तीमारदार

  • उद्घाटन के एक साल बाद भी नहीं शुरू हुआ केजीएमयू का रैन बसेरा
  • खुले में रात बिताने को मजबूर हो रहे तीमारदार, गरीब सबसे अधिक परेशान
  • शिकायतों के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं जिम्मेदार, बस दे रहे आश्वासन

निखिल साहू

लखनऊ। (4पीएम न्यूज़ नेटवर्क) ठंड ने दस्तक दे दी है लेकिन अस्पतालों के रैन बसेरे अभी भी बदहाल पड़े हैं। लिहाजा अन्य जिलों से इलाज कराने पहुंचे मरीजों के तीमारदारों की मुसीबतें बढ़ गई हैं। सैकड़ों तीमारदार खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर हो रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी गरीबों को हो रही है। वहीं शिकायत के बावजूद जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं और लोगों को आश्वासन दे रहे हैं।
प्रदेश में केजीएमयू, बलरामपुर, लोहिया संस्थान और सिविल अस्पताल जैसे नामचीन अस्पताल हैं। यहां आस-पास के जिलों से सैकड़ों लोग इलाज के लिए रोज पहुंचते हैं। इलाज के दौरान मरीजों के तीमारदारों को यही पर रूकना पड़ता है। इन तीमारदारों के लिए अस्पताल की ओर से रैन बसेरों का इंतजाम किया गया है, लेकिन ये किसी काम के नहीं हैं। इसके कारण तीमारदार अस्पताल परिसर और सडक़ किनारे सर्दी में रात बिताने के लिए मजबूर हो रहे हैं। केजीएमयू की हालत और भी खराब है। यहां शताब्दी भवन के पास 7.60 करोड़ की लागत से 210 बेड का रैन बसेरा बनवाया गया है। पिछले साल इसका शुभारंभ तत्कालीन गृहमंत्री और वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था लेकिन इसे आज तक खोला नहीं जा सका है। पीपीपी मॉडल पर संचालित किए जाने वाले रैन बसेरे के लिए केजीएमयू ने टेंडर जारी किया था लेकिन अभी तक टेंडर पास नहीं हो पाया है। लिहाजा तीमारदारों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। बलरामपुर अस्पताल में न्यू बिल्डिंग के सामने बने रैन बसेरे को तोड़ दिया गया है। यहीं एक कमरे को रैन बसेरा बना दिया गया है। इस कमरे में साफ-सफाई की हालत बेहद खस्ता है। यहां की गंदगी संक्रमण को दावत दे रही है। लिहाजा तीमारदार यहां रूकने से बेहतर खुले आसमान के नीचे सोना पसंद करते हैं। अस्पताल के प्रवक्ता एसएन त्रिपाठी का कहना है कि नया रैन बसेरा बनाने थोड़ा समय लगेगा। पुराने अटल बिहारी विश्राम स्थल में ठहरने की व्यवस्था की गई है।

सिविल अस्पताल : हाल बेहाल

हजरतगंज स्थित श्यामा प्रसाद मुखर्जी चिकित्सालय (सिविल अस्पताल) में इमरजेंसी के सामने बने रैन बसेरे की हालत बेहद खराब है। यहां न तो ठंड से बचने के लिए तीमारदारों को कंबल या रजाई दी जाती है न ही साफ-सफाई का उचित प्रबंध किया गया है। हालांकि अस्पताल के निदेशक डॉक्टर डीएस नेगी का कहना है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों के तीमारदारों की सहुलियत के लिए रैन बसेरा बना है। जल्द ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाएगा। साफ-सफाई की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

लोहिया संस्थान : नाम बड़े, दर्शन छोटे

लोहिया संस्थान और अस्पताल को मर्ज किया जा चुका है। बावजूद यहां स्थितियों में कोई सुधार होता नहीं दिख रहा है। अस्पताल ब्लॉक में बने रैन बसेरे की हालत खस्ता है। वहीं संस्थान में रैन बसेरे की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। लोहिया संस्थान के प्रवक्ता डॉ. विक्रम सिंह का कहना है कि अभी हम लोग अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुचारू करने पर ध्यान दे रहे हैं। एक छोटा रैन बसेरा संस्थान के ब्लॉक में बनाया गया है। आने वाले समय में एक और रैन बसेरा बनाएंगे।

रैन बसेरे की टेंडर प्रक्रिया चल रही है। पूरी होने के बाद ही इसे तीमारदारों के लिए खोला जा सकेगा।
-डॉ. सुधीर सिंह ,प्रवक्ता, केजीएमयू

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