लुंज-पुंज चिकित्सा सेवाएं सरकार और जनता

सवाल यह है कि हर साल अरबों खर्च करने के बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार क्यों नहीं हो रहा है? नामचीन अस्पतालों में भी चिकित्सकों, दवाओं और जांच उपकरणों का टोटा क्यों है? मरीजों को अधोमानक दवाएं क्यों मिल रही हैं? आयुष्मान समेत कई योजनाओं का लाभ गरीबों को क्यों नहीं मिल रहा है? प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शोपीस क्यों बने हुए हैं?

Sanjay Sharma

तमाम दावों के बावजूद प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर आती नहीं दिख रही हैं। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। यहां चिकित्सकों व अन्य मेडिकल स्टाफ समेत तमाम संसाधनों का टोटा पड़ा है। गरीब मरीजों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। लिहाजा वे अस्पतालों के चक्कर काटते रहते हैं। सवाल यह है कि हर साल अरबों खर्च करने के बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार क्यों नहीं हो रहा है? नामचीन अस्पतालों में भी चिकित्सकों, दवाओं और जांच उपकरणों का टोटा क्यों है? मरीजों को अधोमानक दवाएं क्यों मिल रही हैं? आयुष्मान समेत कई योजनाओं का लाभ गरीबों को क्यों नहीं मिल रहा है? प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शोपीस क्यों बने हुए हैं? क्या भ्रष्टïाचार ने पूरी व्यवस्था को अपनी चपेट में ले लिया है? क्या सरकार को लोगों की सेहत की कोई चिंता नहीं है?
प्रदेश के अधिकांश सरकारी अस्पतालों की हालत बदतर होती जा रही है। यहां चिकित्सकों, अन्य मेडिकल स्टाफ, दवाओं व जांच उपकरणों की बेहद कमी है। एक-एक चिकित्सक पर तीन सौ से अधिक मरीजों का लोड है। लिहाजा रोगियों को बेहतर इलाज मिलना मुश्किल हो गया है। वहीं कई चिकित्सक प्रतिबंध के बावजूद प्राइवेट प्रैक्टिस में लिप्त हैं। जांच और ऑपरेशन के लिए अस्पतालों में मरीजों को 15-15 दिन बाद की तारीखें दी जा रही हैं। गंभीर रोगियों को दूसरे अस्पताल में रेफर करने का खेल चल रहा है। दवाओं की खरीद में कमीशनखोरी चल रही है। यही वजह है कि मरीजों को अधोमानक दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और उनके जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। आयुष्मान योजना के तहत गरीब मरीज का इलाज करने से नामचीन अस्पताल तक आनाकानी कर रहे हैं। जन औषधि केंद्र शो पीस बन चुके हैं। यहां अधिकांश दवाएं उपलब्ध नहीं है। प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत और भी खराब है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक समय से उपलब्ध नहीं होते हैं। इन केंद्रों में मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। लिहाजा जिला अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टीकाकरण सेंटर में तब्दील हो चुके हैं। यदि सरकार जनता को गुणवत्ता युक्त चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है तो उसे न केवल चिकित्सकों और अन्य मेडिकल स्टाफ के रिक्त पदों पर जल्द से जल्द नियुक्ति करनी होगी बल्कि अस्पतालों को संसाधनों से लैस करना होगा। गुणवत्ता युक्त दवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार पर भी नकेल कसना होगा। इसके अलावा अस्पताल प्रशासन को जवाबदेह भी बनाना होगा।

Loading...
Pin It

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.