प्रतिबंध बेअसर हवा में प्रदूषण का जहर घोल रही भवन निर्माण सामग्री

  • सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भी नहीं सुधर रहे हालात
  • धूल कणों के कारण प्रदूषण के स्तर में नहीं हो रहा सुधार
  • हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं जिम्मेदार, निर्माण कार्य भी जारी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। राजधानी की सडक़ों पर खुले में रखी निर्माण सामग्री और हो रहे भवन निर्माण हवा में प्रदूषण का जहर घोल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट और प्रदेश सरकार की सख्ती के बाद भी स्थितियों में कोई सुधार नहीं हो रहा है। गोमतीनगर समेत राजधानी के तमाम इलाकों में धड़ल्ले से निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। निर्माण के दौरान उडऩे वाली धूल वातावरण में फैल कर हवा को प्रदूषित कर रही है। वहीं जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सडक़ पर निर्माण सामग्री रखने, निर्माण कार्य कराने और ढहाने पर रोक लगा दी है। प्रदेश सरकार ने विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्षों और आवास आयुक्तों को निर्देश दिए है कि इस नियम का कड़ाई से पालन किया जाए लेकिन राजधानी में इन आदेशों को ठेंगा दिखाया जा रहा है। शहर के विभिन्न इलाकों में जगह-जगह गिट्टी, बालू, मोरंग आदि का ढेर लगा है। कुछ इलाकों में फुटपाथ के अलावा आधी सडक़ पर भवन निर्माण सामग्री डालकर अवैध कब्जा कर लिया गया है। इनको न तो नगर निगम का डर है न पुलिस का। कई जगह तो भवन निर्माण सामग्री बेचने वाले दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है और खुलेआम सामग्री रखकर बेची जा रही है। वहीं प्रदूषण को लेकर सरकारी तंत्र की लापरवाही सामने आ रही है। इस्माइलगंज निवासी सत्येन्द्र ने बताया कि सडक़ किनारे रखी भवन सामग्री के कारण काफी दिक्कतें हो रही हैं। अक्सर बालू और मिट्टी के कण उडक़र आंख में पड़ जाते है। इससे काफी परेशानी होती है। इसके अलावा यहां के तमाम इलाकों में धड़ल्ले से निर्माण कार्य कराया जा रहा है लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिम्मेदार सब-कुछ जानते-बूझते हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
नगर निगम के जोन-सात स्थित इस्माइलगंज द्वितीय वार्ड के प्रीति नगर (कमता) में पिछले कई दिनों से मुख्य सडक़ पर भवन निर्माण सामग्री पड़ी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सडक़ मोहल्ले का मुख्य मार्ग है लेकिन निर्माण सामग्री के कारण लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। इसकी शिकायत भी नगर निगम से की गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही हाल गोमती नगर, इंदिरा नगर, सीतापुर रोड समेत पूरे शहर का है।

जुर्माने का है प्रावधान
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण को देखते हुए भवन निर्माण कराने और ढहाने को लेकर जुर्माने का प्रावधान किया है। कोर्ट ने ऐसा करने वाले लोगों के खिलाफ एक लाख रुपया जुर्माना लगाने का आदेश दिया है। इसके अलावा कूड़ा फेंकनें पर भी पांच हजार के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

हादसों को दे रहे न्योता
सडक़ पर पड़ी निर्माण सामग्री हादसों को भी न्योता दे रही हैं। सडक़ किनारे भवन सामग्री रखने के कारण साइड लेते समय इसमें वाहन फंस रहे हैं, जिससे बड़ी दुर्घटना हो सकती है। सबसे ज्यादा दिक्कत रात के समय होती है। लाइट न रहने की दशा में अक्सर लोग भवन सामग्री देख नहीं पाते हैं और फिसल कर गिर जाते हैं। साथ ही इसके कारण जाम की समस्या भी इन सडक़ों पर दिखाई पड़ती है। शहर के प्रमुख मार्गों से लेकर मोहल्लों की सडक़ों के किनारे भवन निर्माण सामग्री बेचने वाले दुकानदारों ने गिट्टी, बालू आदि रखकर कब्जा कर लिया है जो लोगों के लिए मुसीबत का कारण बन गए हैं। यह स्थिति किसी एक जगह की नहीं बल्कि पूरे
शहर की है।

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