चचा ने किया चित

रामपुर वाले चचा ने कमलदल वालों को ऐसे पटका है कि कमर सीधी नहीं हो पा रही है। बेचारे काएं-काएं कर रहे हैं। चले थे चचा से पंगा लेने। एक ही दांव में दिन में तारे नजर आने लगे हैं। अरे यहां चचा का राज चलता है। तुम्हारे मुकदमे लिखा देने भर से उनका राज नहीं चला जाएगा। माना चचा की जुबान थोड़ी तेज चलती है। आंखें पारदर्शी हैं। उनकी आंखें पर्दे के पीछे की चीजें भी बहुत साफ-साफ देख लेती है, इसका यह मतलब नहीं कि लोग उनको छोड़ देंगे। अरे उनको चचा की आदत पड़ चुकी हैं। सो ये पैंतरा कहीं दूसरी जगह लगाओ जी। बड़े-बड़े आए लेकिन चचा की नींव नहीं हिला पाए। यहां तो चचा खुद अपने घरवाली के लिए मैदान में उतरे थे, फिर उनको कैसे हरा लेते जी। खिसिआए कमल दल वाले अब कह रहे हैं कि चचा पीडि़तों वाला कार्ड खेल गए वर्ना रिजल्ट कुछ और होता। अब इनको कौन समझाए नेता कार्ड खेलते हैं तो जनता क्या करती है जी। वह भी कम है क्या।

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