आदेश के बावजूद, धूल और धुआं घोंट रहा राजधानीवासियों का दम

  • धड़ल्ले से हो रहे हैं निर्माण कार्य, गाडिय़ां फैला रहीं प्रदूषण
  • प्रतिबंधों को लागू कराने में जिम्मेदार नजर आ रहे लापरवाह

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सरकार की सख्ती के बावजूद राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए गए प्रतिबंध हकीकत में बदलते नहीं दिख रहे हैं। आदेश के बावजूद राजधानी के तमाम इलाकों में धुल और धुएं का गुब्बार उड़ रहा है। निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी है। वहीं जिम्मेदार पूरी लापरवाही बरत रहे हैं। लिहाजा राजधानीवासियों का दम घुटने लगा हैं।
लखनऊ में प्रदूषण रोकने के सभी प्रतिबंध बेअसर साबित हो रहे हैं। यहां की हवा बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गयी है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 422 के पार हो चुका है। यह खतरनाक जोन में पहुंच चुका है। इसके कारण लोगों को सडक़ पर निकलना मुश्किल हो गया है। राजधानी में प्रदूषण रोकने के लिए सख्त आदेश जारी किए गए थे। इसके तहत निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इसके अलावा सडक़ और पेड़ों पर पानी के छिडक़ाव के लिए कहा गया था। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रामकरन ने आदेश जारी किया था कि जब तक प्रदूषण है निर्माण कार्य न हो। अगर कहीं निर्माण कार्य होता है तो नोटिस देने के साथ सख्त कार्रवाई की जाएगी लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। यहां के तमाम इलाकों में निर्माण कार्य धड़ल्ले से चल रहे हैं। हालांकि एलडीए ने 160 से ज्यादा इंजीनियरों व अधिकारियों को फील्ड में उतारा है। इन पर निर्माण कार्यों को रुकवाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है लेकिन हालात में खास बदलाव नहीं आया। अधिकारियों के वापस जाते ही निर्माण कार्य फिर शुरू हो जाते हैं। गोमती नगर समेत कई इलाकों में धड़ल्ले से निर्माण हो रहा है। दूसरी ओर तमाम डीजल गाडियां धुआं उड़ाती सडक़ों पर फर्राटा भर रही हंै। इसके कारण स्थितियां लगातार बद से बदतर होती जा रही है। गोमतीनगर, अमीनाबाद, हजरतगंज समेत कई इलाकों में प्रदूषण खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है और इसके फिलहाल कम होने के आसार भी नहीं दिख रहे हैं। वहीं अधिकारी मामले को संभालने की जगह आदेश देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं।

वीआईपी इलाकों में हो रहा पानी का छिडक़ावबढ़ रहे प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए नगर निगम की तरफ से सडक़ों और पेड़ो में पानी का छिडक़ाव करने की व्यवस्था की गई है लेकिन ये छिडक़ाव सिर्फ वीआईपी इलाकों में किया जा रहा है। वहीं फायर चीफ ऑफिसर विजय कुमार सिंह का दावा है कि फायर स्टेशन की गाडिय़ां अपने-अपने क्षेत्र में पानी का छिडक़ाव कर रही हैं।

सांस और दिल के मरीज बढ़े
राजधानी में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण हृदय और सांस रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। बच्चे और युवा भी एलर्जी की चपेट में आ रहे हैं। वे सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन की शिकायत लेकर अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि प्रदूषण के कारण सांस और हृदय रोगियों के लिए खतरा बढ़ गया है।

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