जलकल की क्षमता बढ़ाने की तैयारी शुरू, अब पांच लाख की आबादी को मिलेगा शुद्ध पेयजल

  • जल निगम ने शुरू किया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का काम, एक साल का लगेगा समय
  • 60 एमएलडी बढ़ेगी ऐशबाग जलकल की क्षमता, पेयजल उपलब्ध कराने की कवायद

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। शहर के तमाम इलाकों में पेयजल की समस्या को दूर करने की कवायद शुरू हो गई है। ऐशबाग जल कल की क्षमता 60 एमएलडी बढ़ाई जा रही है। इससे शहर की करीब पांच लाख आबादी को फायदा होगा। प्लांट बनाने का काम जल निगम ने शुरू कर दिया है। करीब एक साल में प्लांट से पानी की सप्लाई शुरू हो जाएगी।
जल निगम के अफसरों का कहना है कि पुराने हो चुके 50 एमएलडी के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को देखते हुए ऐशबाग जलकल की क्षमता में इजाफा किया जा रहा है। काम पूरा होने के बाद लालबाग और चारबाग जोनल पंपिंग स्टेशन को पेयजल की कमी दूरी होगी। इसके लिए नलकूप चलाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। प्लांट बनाने का काम जल निगम ने शुरू भी कर दिया है। इसे पूरा होने में एक साल का समय लगेगा। इसके बाद नए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जलकल सप्लाई शुरू कर देगा। नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट शुरू होने से केकेसी जोनल पंपिंग स्टेशन व गढ़ी कनौरा को दोहरा लाभ होगा। अभी यहां पानी की जरूरत पूरा करने के लिए नलकूप चलाने पड़ते हैं, पर नया प्लांट शुरू होने से इन पंपिंग स्टेशनों को जलकल से पर्याप्त पानी मिलने लगेगा। ऐसे में जब जलकल या नलकूप से पानी की सप्लाई में बाधा आई तो दूसरे विकल्प से आपूर्ति हो सकेगी। माना जा रहा है कि पानी की सप्लाई सुचारू रूप से होगी। किसी तरह की खराबी होने के बाद भी लोगों को पानी की दिक्कत नहीं होगी। पानी की सप्लाई के लिए जलकल के पास कई तरह के विकल्प मिलेंगे। इससे इलाके के लोगों को गर्मियों में भी पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। फिलहाल इस सुविधा को पाने के लिए क्षेत्रीय नागरिकों को कम से कम एक साल का इंतजार करना होगा।

Aगर्मियों में भी पानी की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। फिलहाल इस सुविधा को पाने के लिए क्षेत्रीय नागरिकों को कम से कम एक साल का इंतजार करना होगा।

खराब पंपों को किया जा रहा दुरूस्त

शहर में पेयजल की किल्लत न हो इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में लगे खराब पंपों की मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। जहां पानी किल्लत है वहां हैंडपंपों के स्थान पर सबमर्सिबल पंपों को लगाया जा रहा है। अफसरों का कहना है कि शहर के कई इलाकों में जल स्तर गिरने से पुराने हैंडपंप बेकार हो गए हैं। पानी की किल्लत वाले इलाकों में हैंडपंप के स्थान पर सबमर्सिबल पंपों और पानी की टंकी लगाई जाती है जिससे सभी वर्गों को पेयजल की समस्या न हो।

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