नए जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों के मायने

सवाल यह है कि तमाम सुरक्षा इंतजामों के बावजूद आतंकी हमलों पर नियंत्रण क्यों नहीं लग पा रहा है? क्या आतंकियों ने सेना की मुश्तैदी को देखते हुए अपनी रणनीति बदल ली है? गैर-कश्मीरियों को निशाना बनाने के पीछे आतंकियों की मंशा क्या है? क्या पाकिस्तान और अलगाववादियों से मदद नहीं मिल पाने के कारण आतंकवादी बौखला गए हैं?

Sanjay Sharma

अब केंद्र शासित राज्य बन चुके जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के हमले तेज होने लगे हैं। आतंकी सुरक्षा बलों और जनता को निशाना बनाकर ग्रेनेड फेंक रहे हैं। इसमें कई जख्मी हो चुके हैं। कुछ की मौत हो चुकी है। इसके अलावा आतंकी गैर कश्मीरियों को भी निशाना बना रहे हैं। कई गैर कश्मीरियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। सवाल यह है कि तमाम सुरक्षा इंतजामों के बावजूद आतंकी हमलों पर नियंत्रण क्यों नहीं लग पा रहा है? क्या आतंकियों ने सेना की मुश्तैदी को देखते हुए अपनी रणनीति बदल ली है? गैर-कश्मीरियों को निशाना बनाने के पीछे आतंकियों की मंशा क्या है? क्या पाकिस्तान और अलगाववादियों से मदद नहीं मिल पाने के कारण आतंकवादी बौखला गए हैं? क्या घुसपैठ की कोशिश कराने में नाकाम पाकिस्तान कश्मीर में आतंक फैलाने के लिए अब अपने स्लीपर सेल की मदद ले रहा है?
जम्मू-कश्मीर से धारा 370 की समाप्ति से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान पूरी तरह बौखला गया है। भारतीय सेना की मुश्तैदी के चलते वह घाटी में बड़े हमले के लिए आतंकियों की घुसपैठ नहीं करा पा रहा है। यही नहीं भारतीय सेना अब पीओके स्थित आतंकियों के लॉन्चिंग पैड को निशाना बनाने लगी है। इससे पाकिस्तान में बैठे आतंकी और उनके आका भी सतर्क हो चुके हैं। घुसपैठ रोकने के लिए सीमा पर लैंड माइंस बिछाई गई हैं। पिछले दिनों इसे नष्टï करने के लिए पाकिस्तान ने सीमा से सटे जंगलों में आग लगा दी थी, लेकिन भारतीय सेना की मुश्तैदी से उसकी यह चाल भी नाकाम रही। लिहाजा पाकिस्तान और आतंकी संगठनों ने अपनी रणनीति बदल दी है। उसने जम्मू-कश्मीर के अपने स्लीपर सेल को सक्रिय कर दिया है। इसमें स्थानीय आतंकी शामिल हैं। इन आतंकियों को पाकिस्तान से विस्फोटक और हथियार नहीं मिल पा रहे हैं, इसलिए ये दहशत फैलाने के लिए ग्रेनेड का इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले वे सेना को निशाना बनाते थे लेकिन अब आम जनता पर भी हमला कर रहे हैं। इन आतंकियों ने गैर-कश्मीरियों की हत्याएं भी करनी शुरू कर दी हैं। इसके पीछे आतंकियों की मंशा दहशत पैदा करना है ताकि दूसरे प्रांतों के लोग जम्मू-कश्मीर में नहीं आएं। घाटी का व्यापार चौपट हो जाए और यहां का विकास नहीं हो सके। हालांकि ऑपरेशन ऑल आउट से घाटी से अधिकांश आतंकियों का सफाया हो चुका है बावजूद इसके लगातार हो रही आतंकी घटनाओं से साफ है कि जम्मू-कश्मीर सरकार को अभी बहुत कुछ करना बाकी है। जब तक इनका सफाया नहीं हो जाता, घाटी में शांति नहीं हो पाएगी। इसके लिए सरकार को दीर्घकालिक रणनीति बनाकर काम करना होगा।

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