बिजली महकमे के हजारों करोड़ के घोटाले को लेकर घमासान पूर्व एमडी हिरासत में

  • होता रहा हजारों करोड़ का घोटाला और ढाई साल तक सोते रहे चेयरमैन आलोक कुमार
  • बिजली विभाग का घोटाला बना सियासी रणक्षेत्र का मैदान, माया और प्रियंका ने भी बोला हमला
  • एक शिकायत पर अगस्त में ही खुल गया था घोटाले का राज मगर ढाई महीने तक मामले को दबाये रखा चेयरमैन आलोक कुमार ने

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। पावर कार्पोरेशन कर्मचारियों के भविष्य निधि घोटाले को लेकर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। एक ओर इस मामले में गिरफ्तारियां हो रही हैं वहीं दूसरी ओर विपक्ष और सरकार में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सपा, बसपा और कांग्रेस ने प्रदेश की भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा किया है, वहीं सरकार ने पूर्व सरकार पर इसका ठीकरा फोड़ा है।
2268 करोड़ के पीएफ घोटाले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। बसपा प्रमुख मायावती ने इसे महाघोटाला करार दिया और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है। उन्होंने ट्वीट किया, यूपी के हजारों बिजली इंजीनियरों/ कर्मचारियों की कमाई के भविष्य निधि (पीएफ) में जमा 2200 करोड़ से अधिक धन निजी कम्पनी में निवेश के महाघोटाले को भी भाजपा सरकार रोक नहीं पाई तो अब आरोप-प्रत्यारोप से क्या होगा? सरकार सबसे पहले कर्मचारियों का हित व उनकी क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करे। महाघोटाले में सरकार की पहले घोर नाकामी व अब ढुलमुल रवैये से कोई ठोस परिणाम निकलने वाला नहीं है बल्कि सीबीआई जांच के साथ इस मामले में लापरवाही बरतने वाले सभी बड़े ओहदे पर बैठे लोगों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है जिसका जनता को इंतजार है। वहीं, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर पूछा कि दो साल तक भाजपा सरकार मामले में चुप क्यों बैठी रही और किन-किन विभागों का पैसा डिफॉल्टर कंपनियों में लगा है? एक खबर के अनुसार भाजपा सरकार बनने के बाद 24 मार्च 2017 को कर्मियों का पैसा डिफॉल्टर कम्पनी डीएचएफएल में लगा। सवाल ये है कि भाजपा सरकार दो साल तक चुप क्यों बैठी रही? कर्मचारियों को ये बताइए कि उनकी गाढ़ी कमाई कैसे मिलेगी?

क्या है मामला
17 मार्च 2017 को ट्रस्ट के सचिव महाप्रबन्धक प्रवीण कुमार गुप्ता के प्रस्ताव पर तत्कालीन निदेशक वित्त सुधांशु द्विवेदी ने जीपीएफ व सीपीएफ धनराशि को डीएचएफएल में जमा करना शुरू किया। 23 मार्च को एमडी एपी मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया। चौबीस मार्च से डेढ़ साल तक लगातार डीएचएफएल को पैसा दिया जाता रहा और विभाग के चेयरमैन और एमडी आंखें मूंदे रहे। बताया जाता है कि एक प्रभावशाली रिटायर अफसर ने डीएचएफएल के लिए लॉबिंग की थी। दाऊद के खास इकबाल मिर्ची और डीएचएफएल के रिश्ते को लेकर जब हंगामा मचा तो यह मामला भी सुर्खियों में आ गया।

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सपा सरकार में पीएफ का एक भी पैसा डीएचएफएल में नहीं जमा हुआ : अखिलेश

लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पीएफ घोटाले पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिजली विभाग में हुए इस घोटाले से सरकार घबराई हुई है। वह सच्चाई को छिपाना चाहती है। एफआईआर की कॉपी में सबकुछ साफ लिखा गया है। इसमें लिखा है कि किस दिन कंपनी को भुगतान किया गया। उस दिन सपा सरकार नहीं थी। सपा सरकार के दौरान कर्मचारियों के पीएफ का एक भी पैसा डीएचएफएल कंपनी में नहीं जमा किया गया। उन्होंने कहा कि घोटाले के खुलासे के बाद आनन-फानन में सीबीआई जांच की सिफारिश की गई। इस घोटाले के लिए मुख्यमंत्री दोषी हैं। उन्होंने कहा कि सपा की मांग है कि इसकी जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से कराई जाए। इसके बिना सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी। सीबीआई जांच से इसका पता नहीं चलेगा। घोटाले को लेकर सीएम को इस्तीफा देना चाहिए। मुख्यमंत्री इतने कमजोर है कि वे अपने मंत्री को भी नहीं हटा सकते हैं।

सपा सरकार में लिखी गई पटकथा: श्रीकांत शर्मा
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि इस घोटाले की पटकथा सपा सरकार में लिखी गई है। 2014 में इसकी कहानी लिखी गई। हम किसी को नहीं छोड़ेंगे। अभी तो शुरूआत हुई हैं। अभी बहुत सी गिरफ्तारियां होनी हैं।

पूर्व एमडी एपी मिश्रा हिरासत में
यूपी पॉवर कार्पोरेशन के कर्मियों के भविष्य निधि के पैसों को अवैध तरीके से डीएचएफएल में निवेश करने के मामले में पूर्व एमडी एपी मिश्रा को आज ईओडब्ल्यू ने हिरासत में ले लिया। एपी मिश्रा को सोमवार देर रात ही हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

2200 करोड़ से अधिक धन के महाघोटाले को भाजपा सरकार रोक नहीं पाई। सरकार कर्मचारियों का हित और उनकी क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करे। सीबीआई जांच के साथ लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है। -मायावती, बसपा प्रमुख

दो साल तक भाजपा सरकार मामले में चुप क्यों बैठी रही और किन-किन विभागों का पैसा डिफॉल्टर कंपनियों में लगा है? कर्मचारियों को ये बताइए कि उनकी गाढ़ी कमाई कैसे मिलेगी? सारी चीजें अभी सामने लाइए।
-प्रियंका गांधी, महासचिव, कांग्रेस

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