धार्मिक पर्यटन पर फोकस के निहितार्थ

सवाल यह है कि सरकार धार्मिक पर्यटन स्थलों के विकास पर जोर क्यों दे रही है? प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा? क्या उपेक्षित पड़े धार्मिक स्थलों के विकास से प्रदेश से हो रहा पलायन रूक जाएगा? क्या यह नीति राज्य के आर्थिक विकास को रफ्तार देने में सफल होगी? क्या बेहतर कानून व्यवस्था और कुशल प्रबंधन के बिना इसे जमीन पर उतारा जा सकेगा?

sanjay sharma

प्रदेश सरकार उपेक्षित पड़े धार्मिक पर्यटन स्थलों के विकास पर जोर दे रही है। इसी क्रम में अयोध्या का सुंदरीकरण कराने से लेकर भगवान राम की भव्य प्रतिमा स्थापित करने तक की योजना को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा सारनाथ में पर्यटकों की सुविधा के लिए थाना स्थापित करने को भी हरी झंडी दिखा दी गई है। सवाल यह है कि सरकार धार्मिक पर्यटन स्थलों के विकास पर जोर क्यों दे रही है? प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा? क्या उपेक्षित पड़े धार्मिक स्थलों के विकास से प्रदेश से हो रहा पलायन रूक जाएगा? क्या यह नीति राज्य के आर्थिक विकास को रफ्तार देने में सफल होगी? क्या बेहतर कानून व्यवस्था और कुशल प्रबंधन के बिना इसे जमीन पर उतारा जा सकेगा? क्या स्थानीय स्तर पर रोजगार उत्पन्न करने की आशा फलीभूत हो सकेगी?
पर्यटन विकास पर सरकार ने स्पष्टï नीति बनाई है। उपेक्षित पड़े धार्मिक स्थलों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। इन केंद्रों को विकसित करने के लिए बजट की व्यवस्था की जा रही है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि पर्यटन के क्षेत्र में यूपी समृद्ध है। यहां तमाम ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक पर्यटन स्थल हैं। इनमें कई उपेक्षित पड़े थे। मसलन, अयोध्या तीन साल पहले तक उपेक्षित रही। सरकार दीपोत्सव के जरिए इसे विश्व स्तर पर प्रचारित करने में सफल रही। मथुरा में होली के भव्य आयोजन ने पर्यटकों का ध्यान खींचा। लिहाजा पर्यटकों की आमद बढ़ी। इसी तरह प्रयागराज, काशी, कुशीनगर, सारनाथ, विध्यांचल, नैमिषारण्य, चित्रकूट समेत तमाम धार्मिक स्थलों के कायाकल्प पर काम हो रहा है। पिछले दिनों पर्यटन विभाग ने नए ईको और हेरिटेज सर्किट स्थापित करने का प्रस्ताव दिया था। इसके तहत नैमिषारण्य में दशाश्वमेघ घाट, झांसी-ललितपुर में हेरिटेज सर्किट, क्रांति पथ का निर्माण, मिर्जापुर, चुनार व अन्य स्थलों पर हेरिटेज सर्किट, फासिल्स पार्क, कैमूर वन्यजीव विहार में ईको-सर्किट का निर्माण प्रस्तावित है। रामायण, कृष्ण और बौद्ध सर्किट के जरिए भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। दरअसल, धार्मिक पर्यटन स्थलों के विकास के पीछे सरकार की मंशा न केवल आर्थिक लाभ प्राप्त करना है बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर रोजगार के साधन भी सृजित करना है। यदि इन केंद्रों का विकास और सौन्दर्यीकरण हो गया तो पर्यटकों की संख्या में काफी इजाफा होगा और इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। बावजूद इसके यह सब करना सरकार के लिए आसान नहीं है। इसके लिए सरकार को न केवल प्रदेश की कानून व्यवस्था को बेहतर बनाना होगा बल्कि केंद्रों के विकास के लिए कुशल प्रबंधकों को भी नियुक्त करना होगा।

 

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