बढ़ते सडक़ हादसे और लचर सिस्टम

सवाल यह है कि सडक़ हादसों पर नियंत्रण क्यों नहीं लग पा रहा है? क्यों हर साल प्रदेश में हजारों लोगों की मौत वाहनों की चपेट में आने से हो रही है? सडक़ सुरक्षा जागरूकता अभियान बेअसर क्यों हो रहा है? क्या यातायात नियमों का उल्लंघन इन मौतों के लिए जिम्मेदार नहीं है? क्या खराब सडक़ें और लचर सिस्टम के कारण हादसों में इजाफा हो रहा है?

Sanjay Sharma

लखनऊ में एक बस ने फुटपाथ पर सो रहे लोगों को रौंद दिया। दो मासूमों की मौत हो गई जबकि पांच गंभीर घायल हो गए। वहीं फिरोजाबाद में हुए सडक़ हादसे में एक युवक की मौत हो गई। एक ही दिन में घटी ये घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि सडक़ पर चलना कितना मुश्किल हो गया है। सवाल यह है कि सडक़ हादसों पर नियंत्रण क्यों नहीं लग पा रहा है? क्यों हर साल प्रदेश में हजारों लोगों की मौत वाहनों की चपेट में आने से हो रही है? सडक़ सुरक्षा जागरूकता अभियान बेअसर क्यों हो रहा है? क्या यातायात नियमों का उल्लंघन इन मौतों के लिए जिम्मेदार नहीं है? क्या खराब सडक़ें और लचर सिस्टम के कारण हादसों में इजाफा हो रहा है? क्या सरकार दुर्घटनाओं को लेकर गंभीर नहीं है?
प्रदेश में सडक़ हादसों में मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इन दुर्घटनाओं के कई कारण हैं। अधिकांश मामलों में यातायात नियमों का उल्लंघन, खराब सडक़ें और अप्रशिक्षित चालक इसकी वजह हैं। दलालों की मदद से ड्राइविंग का टेस्ट दिए बिना चालक ड्राइविंग लाइसेंस हासिल कर लेते हैं। ये चालक जब सडक़ों पर फर्राटा भरते हैं तो यातायात के नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं। विभिन्न सडक़ों पर निर्धारित सीमा से अधिक गति से दौड़ते वाहन दुर्घटनाओं की वजह बन रहे हैं। शहरों का हाल और भी खराब है। यहां टै्रफिक सिस्टम पूरी तरह चरमरा चुका है। अधिकांश शहरों में सिग्नल सिस्टम काम नहीं करता है। चौराहों पर टै्रफिक पुलिस नदारद रहती है। पुलिस के जवान पैसे लेकर ओवरलोड वाहनों को पीक ऑवर में शहरों में प्रवेश दे देते हैं। इससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। प्रदेश की सडक़ों की हालत बेहद खस्ता है। तमाम सडक़ों पर बड़े-बड़े गड्ढे बने हैं। जिसके कारण हादसे की आशंका और बढ़ जाती है। इन गड्ढों से होने वाली दुर्घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जाहिर कर चुका है। बावजूद इसके सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। मानकों के विपरीत बने स्पीड बे्रकर, शराब पीकर और मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने के कारण भी हादसों में इजाफा हुआ है। ऐसे कई केस सामने भी आ चुके हैं। बिना हेलमेट वाहन चलाने की वजह से भी हादसों के दौरान होने वाली मौत के आंकड़ों वृद्धि हुई है। यह स्थिति तब है जब सडक़ सुरक्षा सप्ताह के जरिए यातायात पुलिस लोगों को जागरूक करने की कोशिश करती रहती है। यदि सरकार हादसों को नियंत्रित करना चाहती है तो उसे यातायात के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराना होगा। संबंधित विभाग को जवाबदेह बनाना होगा और मानकों के मुताबिक सडक़ों का निर्माण करना भी सुनिश्चित करना होगा।

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