जहरीली होती हवा और लापरवाह तंत्र

सवाल यह है कि प्रदेश के तमाम शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार क्यों बढ़ रहा है? जुर्माने के बाद भी किसान पलारी क्यों जला रहे हैं? राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नौकरशाही क्या कर रही है? क्या बढ़ते प्रदूषण के लिए नियमों को धता बताकर प्रदेश भर में कराए जा रहे निर्माण कार्य और सडक़ों पर लगने वाला जाम जिम्मेदार नहीं है? प्रदूषण नियंत्रण के फौरी इंतजाम क्यों नहीं किये जा रहे हैं?

Sanjay Sharma

प्रदेश की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। वायु प्रदूषण का आलम यह है कि देश के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में यूपी के आठ शहर मेरठ, हापुड़, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, नोएडा, बागपत, बुलंदशहर और कानपुर शामिल हो गए हैं। 488 एयर क्वालिटी इंडेक्स के साथ हापुड़ और मेरठ देश के सबसे प्रदूषित शहर बन गए हैं जबकि गाजियाबाद तीसरा सबसे प्रदूषित शहर है। सवाल यह है कि प्रदेश के तमाम शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार क्यों बढ़ रहा है? जुर्माने के बाद भी किसान पलारी क्यों जला रहे हैं? राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नौकरशाही क्या कर रही है? क्या बढ़ते प्रदूषण के लिए नियमों को धता बताकर प्रदेश भर में कराए जा रहे निर्माण कार्य और सडक़ों पर लगने वाला जाम जिम्मेदार नहीं है? प्रदूषण नियंत्रण के फौरी इंतजाम क्यों नहीं किये जा रहे हैं? जिम्मेदार विभाग अपने कर्तव्यों को निभाने में पीछे क्यों हैं? क्या लोगों की सेहत की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है?
कई वर्षों से उत्तर प्रदेश में सर्दियों के मौसम में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। किसानों द्वारा फसलों के अवशेष यानी पलारी जलाने से स्थितियां बिगड़ती जा रही हैं। हालांकि प्रदूषण के लिए केवल यही एक कारण जिम्मेदार नहीं है। हकीकत यह है कि यहां के तमाम शहरों में लगातार निर्माण कार्य चल रहा है। बिल्डर प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन किए बिना धड़ल्ले से निर्माण कार्य करा रहे हैं। इसके कारण धूल कण हवा के साथ वातावरण में फैल जाते हैं। यह धूल वाहनों और पलारी जलाने से निकलने वाले धुएं के साथ मिलकर प्रदूषण स्तर को खतरनाक बना देते हैं। यह प्रदूषण लोगों की सेहत पर नकारात्मक असर डालते हैं। इसके अलावा वायु प्रदूषण से सांस और दिल के रोगियों के लिए खतरा बढ़ जाता है। नौकरशाही पलारी जलाने वाले किसानों को नोटिस जारी कर रही है जबकि साल भर चलने वाले निर्माण कार्य, ईंट भट्ठों और कारखानों से निकलने वाले धुएं से होने वाले वायु प्रदूषण के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। जाम के दौरान वाहनों से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण के स्तर को बढ़ा रहा है। यदि सरकार वायु प्रदूषण को कम करना चाहती है तो उसे न केवल किसानों को जागरूक करना होगा बल्कि पलारी के निस्तारण के लिए कोई प्रदूषणरहित विकल्प भी उपलब्ध कराना होगा। इसके अलावा लगातार प्रदूषण फैला रहे अन्य कारकों को भी समाप्त करना होगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी प्रदूषण फैला रही इकाइयों के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे। यदि ऐसा नहीं हुआ तो शहरों को प्रदूषण मुक्त करना आसान नहीं होगा और लोगों का सांस लेना दूभर हो जाएगा।

Loading...
Pin It

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.