भारत और सऊदी की बढ़ती दोस्ती के मायने

सवाल यह है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की जरूरत क्यों पड़ी? क्या अपने आर्थिक मॉडल के खतरे से निपटने के लिए सऊदी अरब को भारत की दरकार है? क्या इस संबंध से भारत एक तीर से कई निशाने साध रहा है? क्या सऊदी अरब को अपने साथ कर भारत मध्य पूर्व एशिया में पाकिस्तान व चीन को अलग-थलग करना चाहता है?

sanjay sharma

भारत और सऊदी अरब के बीच दोस्ती प्रगाढ़ हो रही है। दोनों देशों के बीच निवेश समेत विभिन्न क्षेत्रों में 12 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं। दोनों रणनीतिक साझेदारी के लिए एक काउंसिल के गठन पर भी राजी हो गए हैं। इसके जरिए सरकार टू सरकार मैकेनिज्म बनाया जाएगा। सवाल यह है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की जरूरत क्यों पड़ी? क्या अपने आर्थिक मॉडल के खतरे से निपटने के लिए सऊदी अरब को भारत की दरकार है? क्या इस संबंध से भारत एक तीर से कई निशाने साध रहा है? क्या सऊदी अरब को अपने साथ कर भारत मध्य पूर्व एशिया में पाकिस्तान व चीन को अलग-थलग करना चाहता है? दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर पड़ेगा?
भारत और सऊदी अरब के बीच रिश्तों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। तीन साल में पीएम मोदी दूसरी बार सऊदी अरब गए। वे फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनीशिएटिव समिट में शामिल हुए और भारत के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश का न्योता निवेशकों को दिया। सऊदी अरब भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करने जा रहा है। यह निवेश ऊर्जा, रिफायनरी, पेट्रोकेमिकल्स, कृषि और खनन क्षेत्र में होगा। अब दोनों देशों का रिश्ता सामरिक भी हो गया है। काउंसिल का गठन इसी का परिणाम है। सऊदी अरब में 26 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं। इसने भी दोनों के रिश्ते मजबूत हुए हैं। यही वजह है कि पाकिस्तान से पांरपरिक रिश्तों के बावजूद सऊदी अरब ने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को हटाने पर भारत का समर्थन किया और आतंक के खिलाफ लड़ाई में साथ देने का भरोसा भी दिया। दोनों देशों के बीच पहला नौसैन्य अभ्यास जल्द होगा। कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है और इस्लाम के नाम पर मुस्लिम देशों को एकजुट करने की पाकिस्तानी पीएम इमरान की मुहिम की हवा निकल गई है। सच यह है कि सऊदी अरब को भारत की जरूर है। तेल पर आधारित उसका आर्थिक मॉडल खतरे में हैं। निकट भविष्य में तेल भंडार खत्म होने के खतरे को देखते हुए वह अभी से नया इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की कवायद कर रहा है। यही वजह है कि वह भारत में बड़े निवेश को तैयार है। साथ ही भारत भी उसके आर्थिक ढांचे को मजबूती देने के लिए वहां निवेश समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दे रहा है। इसके अलावा सऊदी अरब भारत जैसे देशों के साथ सामरिक संबंध बनाकर खुद की सुरक्षा को भी मजबूती देना चाहता है। कुल मिलाकर ये रिश्ते दोनों देशों के लिए लाभदायक हैं। इसके अलावा ये रिश्ते मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभा सकेंगे।

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