लखनऊ समेत आधा दर्जन शहरों का नए सिरे से तय होगा दायरा, बढ़ेंगी सुविधाएं

  • आधा दर्जन नगर निगमों के सीमा विस्तार की तैयारी, सैकड़ों गांव होंगे प्रभावित
  • नगर विकास विभाग ने तैयार किया खाका, संशोधित किए जाएंगे पूर्व प्रस्ताव

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। वर्षों बाद लखनऊ समेत प्रदेश के आधा दर्जन शहरों का दायरा नए सिरे से तय करने की तैयारी शुरू हो गई है। हालांकि तीन साल पहले भी लखनऊ नगर निगम की सीमा का विस्तार होना था लेकिन यह काम नहीं हो सका था लेकिन अब नगर विकास विभाग ने प्रदेश के बड़े शहरों की सीमा का विस्तार करने का फैसला किया है। पहले से सीमा विस्तार की लिस्ट में संसोधन भी किया जा सकता है। लिस्ट में आस-पास के ग्रामीण इलाके शामिल किए जाएंगे।
पहले चरण में लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, गाजियाबाद, शाहजहांपुर और फिरोजाबाद शामिल हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगर विकास विभाग ने इन नगर निगमों से सीमा विस्तार संबंधी प्रस्ताव देने को कहा है। जिन नगर निगमों का सीमा विस्तार संबंधी प्रस्ताव पूर्व में आ गया था, उसमें संशोधन कराते हुए उसे नए सिरे से भेजने को कहा गया है। नगर विकास विभाग अब इसके आधार पर सीमा विस्तार करने की तैयारियों में जुट गया है। नगर निगम के साथ नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों की सीमा का भी विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही नई नगर पंचायतें और पालिका परिषद बनाने का काम भी जल्द शुरू हो जाएगा। नगर विकास विभाग के मुताबिक बड़े शहरों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। नगर निगम सीमा से सटे हुए क्षेत्र के गांवों की जमीनों पर सोसायटी कालोनियां बसा रही हैं। इसके साथ ही विकास प्राधिकरण भी गांवों की जमीनों को लेकर आवासीय योजनाएं ला रहा है। कई कालोनियां ऐसी हैं जो कहने को शहर में हैं, लेकिन वे ग्राम पंचायत में आती हैं। नगर निगम पर ऐसी कालोनियों में विकास कराने का दबाव पड़ता है पर उनसे हाउस टैक्स नहीं लिया जा सकता। नगर विकास विभाग इसी आधार पर शहरी सीमा के गांवों में बसी कालोनियों को नगर निगम सीमा में लाना चाहता है, जिससे इनका सुनियोजित विकास भी हो सके और इनसे हाउस टैक्स की वसूली भी हो सके। गौरतलब है कि नगर निगम सीमा विकास प्राधिकरण सीमा से आठ किमी अधिक होता है। अगर सरकार चाहे तो इससे अधिक भी कर सकती है। मौजूदा समय में विकास प्राधिकरणों के लिए 2031 की महायोजना तैयार करने का काम चल रहा है। इसके लिए शहरी सीमा अधिकतर बड़े शहरों की तय कर दी गई है। गौरतलब है कि वर्ष 1987 में लखनऊ का विस्तार हुआ था। उस समय 81 गांव नगर निगम में शामिल किए गए थे। अब फिर सीमा विस्तार को लेकर कवायद तेज हो गई है।

1987 में लखनऊ का विस्तार हुआ था। उस समय 81 गांव नगर निगम में शामिल किए गए थे। अब एक बार फिर सीमा विस्तार को लेकर कवायद तेज हो गई है।

जनता को मिलेंगी सुविधाएं
्रलंबे समय से सीमा विस्तार न होने से विभिन्न शहरों के लोगों को सडक़, नाली, खड़ंजा और पेयजल जैसी सुविधाएं बमुश्किल मिलती थीं लेकिन अगर सीमा विस्तार होता है तो एक ओर नगर निगम को टैक्स मिलेगा वहीं दूसरी ओर जनता को तमाम मूलभूत सुविधाएं भी मिलेंगी।

राजधानी में इन गांवों को किया जाना था शामिल
सीतापुर रोड: मौरा, जेहटा, सैंथा, अली नगर, घैला, नरहरपुर, अल्लू नगर डिगुरिया, मुतक्कीपुर, रायपुर, कमलाबाद बढ़ौली, तिवारीपुर, भिठौली खुर्द, मोहिउद्दीनपुर, खरगपुर, जागीर, सैदपुर जागीर और मिर्जापुर।
कुर्सी रोड: रसूलपुर कायस्थ, अजहाबाद कलां, मिश्रपुर, गुडंबा, बरखुरदारपुर, आधार खेड़ा, बसहा, दसौली, मोहम्मदपुर मजरा और रसूलपुर सादात।
फैजाबाद रोड: गोयला, नौबस्ता कलां, धावा, गणेशपुर, रहमानपुर, सेमरा, उत्तरधौना, शाहपुर, सराय शेख, टेरा खास, निजामपुर मल्हौर, लौलाई, हासेमऊ, भरवारा, खरगापुर, भैसोरा, लोनापुर, चंदियामऊ, मकदूमपुर, मलेसेमऊ, बाघामऊ।
सुल्तानपुर रोड: सरसवां, अदरौनामऊ, अहमामऊ, हरिहरपुर, मलाक, मुजफ्फरनगर घुसवाल, युसुफनगर, चक कंजेहरा, निजामपुर मझिगवां, देवामऊ, माढरमऊ कलां, माढरमऊ खुर्द, सोनई कंजेहरा और सेवई।
रायबरेली रोड: घुसवल कलां, बरौली खलीलाबाद, कल्ली पश्चिम, अशरफ नगर और रसूलपुर इठूरिया, हरिकंशगढ़ी और पुरसेनी।
कानपुर रोड: बिजनौर, नटकुर, मिरानपुर पिनवट, अनौरा, कलिया खेड़ा, सदरौना, अमौसी और अलीनगर सुनहरा।
मोहान रोड: सरोसा-भरोसा और नरौना
हरदोई रोड: सलेमपुर पतौरा, सिकरौरी, लालनगर, सराय प्रेमराज, महिमतमऊ और अमेठिया सलेमपुर

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