जीरो टॉलरेंस की नीति और अपराधों का ग्राफ

सवाल यह है कि अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के बावजूद वारदातें थम क्यों नहीं रही हैं? आए दिन हत्या, लूटपाट और बलात्कार जैसे संगीन अपराध क्यों हो रहे हैं? क्या पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार और लापरवाह कार्यप्रणाली के कारण कानून व्यवस्था की हालत खस्ता होती जा रही है? क्या स्थानीय खुफिया तंत्र की सुस्ती के कारण अपराधी सलाखों के पीछे नहीं पहुंच पा रहे हैं?

Sanjay Sharma

अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की पोल खुल गई है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी)की रिपोर्ट के मुताबिक देश में हत्या और अपहरण की वारदातें उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक हुई हैं। 2017 में यूपी में सबसे ज्यादा 4324 हत्याएं हुईं जबकि महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों के 56011 मामले दर्ज किए गए। सवाल यह है कि अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के बावजूद वारदातें थम क्यों नहीं रही हैं? आए दिन हत्या, लूटपाट और बलात्कार जैसे संगीन अपराध क्यों हो रहे हैं? क्या पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार और लापरवाह कार्यप्रणाली के कारण कानून व्यवस्था की हालत खस्ता होती जा रही है? क्या स्थानीय खुफिया तंत्र की सुस्ती के कारण अपराधी सलाखों के पीछे नहीं पहुंच पा रहे हैं? क्या ऐसी स्थिति में कानून का राज स्थापित किया जा सकेगा? क्या जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी नहीं है? क्या ऐसे प्रदेश विकास की राह पर दौड़ पाएगा?
एनसीआरबी की रिपोर्ट बेहद चिंतनीय है। इसकी वजहें भी हैं। प्रदेश में अपराधों का ग्राफ बढऩे के पीछे पुलिस की कार्यप्रणाली जिम्मेदार है। स्थानीय खुफिया तंत्र लचर हो चुका है। पुलिस विभाग में भ्रष्टïाचार व्याप्त है। जनता के प्रति पुलिस का व्यवहार बेहद खराब है। अपराधों का आंकड़ा कम दिखाने के लिए कई बार पीडि़तों को थाने से भगा दिया जाता है। उनकी रिपोर्ट नहीं लिखी जाती है। पीडि़तों पर आरोपी से समझौता करने का दबाव बनाया जाता है। ऐसा नहीं करने पर नतीजा भुगतने की धमकी तक दी जाती है। अपराधी और पुलिस का गठजोड़ जगजाहिर है। कई पुलिसकर्मी अपराधियों के साथ मिलकर अपराध करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे कई मामले उजागर हो चुके हैं। अपराधों पर नियंत्रण लगाने के लिए पुलिस तंत्र के पास कोई ठोस रणनीति तक नहीं है। अपराधी को पकडऩे के लिए वे सीसीटीवी फुटेज पर निर्भर हो चुके हैं। स्थानीय खुफिया तंत्र पूरी तरह विफल साबित हो चुका है। बड़ी वारदातों की भनक तक पुलिस को नहीं लग पाती है। वहीं अपराधी अपराध को अंजाम देकर आराम से फरार हो जाते हैं। कई बार पुलिसकर्मी केस को इतना कमजोर कर देते हैं कि अपराधी सलाखों के पीछे नहीं पहुंच पाता है और जमानत लेकर अन्य आपराधिक वारदातों को अंजाम देता है। यदि सरकार प्रदेश में कानून का राज स्थापित करना चाहती है तो उसे न केवल पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार को समाप्त करना होगा बल्कि अपराधियों और पुलिसकर्मियों के गठजोड़ को भी खत्म करना होगा। साथ ही उसे जघन्य अपराधों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस ले जाना होगा ताकि अपराधियों को त्वरित सजा मिल सके।

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