स्मॉग का खतरा और सरकारी तंत्र

सवाल यह है कि हर साल स्मॉग से होने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति आज तक क्यों नहीं बनाई गई? क्या स्मॉग को रोकना नामुमकिन है? क्या बढ़ता प्रदूषण लालफीताशाही की लापरवाही का नतीजा है? क्या लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने की छूट किसी को दी जा सकती है?

Sanjay Sharma

सर्दियों की दस्तक के साथ ही यूपी की राजधानी लखनऊ समेत तमाम शहरों में स्मॉग का खतरा बढ़ गया है। स्मॉग यानी कोहरे, धूल और धुएं के मिश्रण ने वातावरण को प्रदूषित कर दिया है। यह खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है, जिससे लोगों की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। सवाल यह है कि हर साल स्मॉग से होने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति आज तक क्यों नहीं बनाई गई? क्या स्मॉग को रोकना नामुमकिन है? क्या बढ़ता प्रदूषण लालफीताशाही की लापरवाही का नतीजा है? क्या लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने की छूट किसी को दी जा सकती है? क्या निर्माण इकाइयों से उठने वाली धूल और वातावरण में फैलते धुएं को रोकने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है? उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड क्या कर रहा है?
पिछले कई वर्षों से स्मॉग प्रदेश की हवा को जहरीला बनाने का काम कर रहा है। सबसे खराब स्थिति लखनऊ की है। यहां वायु प्रदूषण गहराता जा रहा है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) तीन सौ के पार जा चुका है व इसके बढऩे की आशंका है। प्रदूषण के मामले में लालबाग, तालकटोरा, गोमतीनगर और अलीगंज की हालत सबसे खराब है। इसके अलावा मुरादाबाद, मेरठ और आगरा में भी प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है जबकि सांस लेने के लिए वायु गुणवत्ता सूचकांक दो सौ से अधिक नहीं होना चाहिए। प्रदेश के तमाम शहरों में स्मॉग से पैदा होने वाला प्रदूषण एक दिन में नहीं उत्पन्न हुआ है। सच यह है कि निर्माण इकाइयां से उडऩे वाली धूल, ईंट भट्ठों और वाहनों से निकलने वाला धुआं इसके लिए जिम्मेदार है। सर्दियों में कोहरे के कारण धूल और धुआं खुले आसमान में नहीं पहुंच पाते हैं। वे कोहरे के साथ मिलकर स्मॉग बनाते हैं। इसके कारण वायु की गुणवत्ता प्रभावित होती है और वह प्रदूषित हो जाती है। हवा नहीं चलने की स्थिति में स्मॉग खतरनाक हो जाता है। बावजूद इसके न तो जिम्मेदार विभाग और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इसको लेकर गंभीर नजर आते हैं। संबंधित विभाग निर्माण इकाइयों को नोटिस भेजकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। कड़ी कार्रवाई नहीं होने के कारण ये इकाइयां भी नियम-कायदों को ताक पर रखकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ करती रहती हैं। यदि सरकार स्मॉग से लोगों को बचाना चाहती है तो उसे न केवल संबंधित विभागों को जवाबदेह बनाना होगा बल्कि प्रदूषण फैला रही इकाइयों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी इस पर सतत निगरानी रखनी होगी। अन्यथा लोग प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर होते रहेंगे।

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