स्कूलों को बोर्ड परीक्षा केंद्र बनवाने में खेला जा रहा नंबरों का खेल

  • 50 हजार के चढ़ावे पर बदल जाती है संसाधनों की रिपोर्ट
  • चहेते स्कूलों की भेजी जाती है फर्जी रिपोर्ट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

गोंडा। बोर्ड परीक्षा के लिए स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाए जाने का राज जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से प्रदान किए जाने वाले नंबरों में छिपा है। यह नंबर स्कूलों को उनके यहां उपलब्ध संसाधनों के बदले दिए जाते हैं। जिन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया जाना होता है वहां के संसाधनों की बढ़ा-चढ़ाकर रिपोर्ट भेज दी जाती है जबकि संसाधनों से लैस स्कूलों की रिपोर्ट में मामूली फेरबदल कर उसके नंबर घटा दिए जाते हैं। अधिक नंबर पाने के लिए 50 हजार रुपये का चढ़ावा डीआईओएस कार्यालय में चढ़ाना होता है। चढ़ावे की रकम मिलते ही स्कूलों की रिपोर्ट बदल जाती है।
बोर्ड परीक्षा केंद्र निर्धारण की कार्रवाई माध्यमिक शिक्षा परिषद करती है लेकिन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाए जाने की रिपोर्ट डीआईओएस कार्यालय की तरफ से भेजी जाती है। परीक्षा केंद्र बनाए जाने के लिए बोर्ड ने मानक तय कर रखे हैं। परीक्षा केंद्र बनने वाले स्कूलों में कमरों की पर्याप्त संख्या के अलावा वहां सीसीटीवी कैमरा, रिकार्डर, पेयजल, शौचालय समेत अन्य संसाधनों की उपलब्धता आवश्यक है। संसाधनों के आधार पर नंबर आवंटित किए जाते हैं। मसलन 10 कमरों वाले स्कूल को 10 अंक, 11से 15 कमरे वाले स्कूल को 15 अंक, 16 से 20 कमरे वाले स्कूल को 20 अंक व 21 से 25 कमरे वाले स्कूल को अधिकतम 25 अंक देने का नियम है। इसी अंक निर्धारण में रिपोर्ट भेजते समय खेल किया जाता है। जैसे यदि किसी स्कूल में 20 कमरे बने हैं और उसे परीक्षा केंद्र नहीं बनाना है तो रिपोर्ट में वहां के कमरों की संख्या मामूली रूप से घटाकर 18 कर दी जाती है इससे उसके पांच अंक कम हो जाते हैं। वहीं 15 कमरों वाले स्कूल में एक कमरे की रिपोर्ट बढ़़ा देने पर उसके अंक 15 से बढक़र 20 हो जाते हैं। अंक बराबर होते ही अपने चहेते स्कूल को परीक्षा केंद्र बनाए जाने की रिपोर्ट बोर्ड को भेज दी जाती है। यह अंतर इतना मामूली होता है कि स्कूल के प्रधानाचार्य इस खेल को नहीं समझ पाते और उनका स्कूल परीक्षा केंद्र बनने से वंचित रह जाता है जबकि संसाधन विहीन स्कूल परीक्षा केंद्र बन जाते हैं। सूत्रों की माने तो इस खेल को अंजाम देने के लिए 50 हजार रुपये की फीस निर्धारित है। नंबर के इस खेल को लेकर जब डीआईओएस अनूप कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके स्तर से कोई गड़बड़ी नहीं की जाती है जो भी केंद्र बनते है वह बोर्ड से ही बनते हैं।

समीक्षा बैठक से गैरहाजिर सुपरवाइजरों का वेतन रोका

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
गोंडा। मेहनौन विधानसभा के निर्वाचन नामावली की समीक्षा को लेकर बुलाई गई बैठक में 23 सुपरवाइजर गैरहाजिर रहे। इस पर नाराजगी जताते हुए उप निर्वाचन अधिकारी ने इन सभी का एक दिन का वेतन रोकने का निर्देश दिया है। उप निर्वाचन अधिकारी एवं बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी जगदीप यादव ने बताया कि सोमवार को मेहनौन विधानसभा के निर्वाचन नामावली की प्रगति जानने के लिए समीक्षा बैठक बुलाई गई थी लेकिन सुपरवाइजर बैठक से गैरहाजिर रहे। इन सभी का एक दिन का वेतन रोककर जवाब मांगा गया है।

जांच में लापरवाही का आरोप
लखनऊ। (4पीएम न्यूज़ नेटवर्क) डफरिन अस्पताल में भर्ती एक महिला के तीमारदारों ने जांच में लापरवाही का आरोप लगाया है। परिवारीजनों के मुताबिक 18 अक्टूबर को अमन राठौर की नौ माह की गर्भवती पत्नी चांदनी को डफरिन में भर्ती किया गया था। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में डॉक्टर ने गर्भस्थ की धडक़न चलने की पुष्टि की। डॉक्टर ने गर्भवती को मंगलवार को प्रसव की तारीख दी। प्रसव से ठीक पहले सोमवार को जब डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड करवाया तो रिपोर्ट में पता चला कि गर्भस्थ शिशु सात दिन पहले ही गर्भ में दम तोड़ चुका है। परिजनों का आरोप है कि शुक्रवार को अल्ट्रासाउंड में शिशु स्वस्थ बताया गया था। तीमारदारों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। अस्पताल की एसआईसी डॉ. नीरा जैन के मुताबिक मरीज की पहली अल्ट्रासाउंड जांच हुई है, दो बार जांच होने का आरोप गलत है।

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