मुख्तार को घेरने की लखनऊ पुलिस की रणनीति पर हाईकोर्ट का हंटर लगी फटकार

  • मुख्तार को घेरने के लिए रणनीति तो शानदार बनाई थी एसएसपी लखनऊ ने मगर नहीं मिली कामयाबी
  • मुख्तार को पंजाब से यूपी लाने की रणनीति पर बनी थी यह योजना
  • मुख्तार को डर कि उसके साथ भी न हो जाए मुन्ना बजरंगी जैसा कांड

4PM News Network

लखनऊ। मुख्तार अंसारी को यूपी लाने की रणनीति पर काम तेज हो गया है। लखनऊ पुलिस ने जिस तेजी के साथ मुख्तार के बेटे के घर से अवैध हथियारों का जखीरा बरामद किया है उसने इस बाहुबली को परेशान कर दिया है। यूपी का यह बाहुबली जानता है कि अगर उसे यूपी आना पड़ा तो उसका हश्र भी मुन्ना बजरंगी जैसा हो सकता है । पिछले कुछ दिनों में मुख्तार के करीबियों की हत्या ने यह बात साबित भी कर दी है कि पूर्वांचल के बड़े डॉन अब एक दूसरे को निपटाने की योजना में जुट गये हैं। पुलिस के लिये इससे बढिय़ा कोई दूसरी बात नहीं कि अपराधी एक दूसरे को निपटाएं या पुलिस को सूचना दें। पुलिस इस रणनीति में कामयाब भी हो जाती मगर आज हाईकोर्ट ने पुलिस की थ्योरी को खारिज करके फटकार लगाई और तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा।
सरकार बनने के बाद से ही मुख्तार अंसारी पुलिस के निशाने पर है। पूर्वांचल में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के बाद से मुख्तार का बढ़ता कद भाजपा को कभी पसंद नहीं आया। मुन्ना बजरंगी जैसे बड़े माफिया का साथ मुख्तार को और मजबूर बनाता रहा। पर जिस तरह से बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या हुई और उसके बाद मुख्तार के कुछ करीबियों को दिनदहाड़े मार दिया गया उसने इस बाहुबली को परेशान कर दिया। मुख्तार को समझ आ गया कि यूपी की वे जेलें जहां उनकी बादशाहत चलती थी अब उसके लिये सुरक्षित नहीं रहीं, लिहाजा उन्होंने रणनीति के तहत पंजाब के मुकदमों के कारण वहां जाना उचित समझा। पुलिस और एसटीएफ लंबे समय से उन्हें यूपी वापस लाने की रणनीति पर काम कर रही थी। इसी बीच लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी को पता चला कि मुख्तार के बेटे अब्बास के पास कई अवैध हथियार हैं। उन्होंने बिना देर किये इस पर रणनीति बनायी। तय किया गया कि शेर को मांद से निकालने के लिये उसके बेटे को इस्तेमाल किया जाये। एसएसपी ने खुद इस ऑपरेशन की कमान संभाली तेजतर्रार पुलिस वालों को इस टीम में शामिल किया गया और दिल्ली से अब्बास के घर से हथियारों का जखीरा बरामद हो गया। जाहिर है एसएसपी नैथानी अपनी इस रणनीति में न सिर्फ कामयाब हुए बल्कि उन्होंने इस बाहुबली को परेशान कर दिया। मुख्तार और उसके बेटे के अगले कदम पर पुलिस , एसटीएफ के साथ उसके विरोधी माफियाओं की भी निगाह लगी है। आने वाले कुछ दिन यूपी के माफियाओं के लिये परेशानी भरे हो सकते हैं।

सीएम से मिलेंगे कमलेश के परिजन, पुलिस के खुलासे में झोल ही झोल

  • कमलेश तिवारी का अंतिम संस्कार करने को राजी नहीं थे परिजन, कहा पुलिस की लापरवाही से हुई हत्या
  • डीजीपी का दावा हत्या में सूरत के लोगों का कनेक्शन, मगर कोई सबूत नहीं पेश किया
  • सीएम थे कल बहुत खफा, उनकी नाराजगी देखकर आधा-अधूरा हुआ खुलासा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सीएम की फटकार के बाद आज डीजीपी ने प्रेस काफ्रेंस करके दावा किया कि सूरत में कमलेश तिवारी हत्याकांड की साजिश रची गई थी। हत्यारे 2015 के कमलेश तिवारी के बयान को लेकर नाराज थे। मगर पूरी प्रेस कांफ्रेंस में ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया जो यह साबित करता हो कि सूरत में पकड़े गए तीन लोग ही इस घटना के मास्टर माइंड थे।
मजे की बात यह रही कि डीजीपी इन तीन लोगों से ही साजिश कर पर्दाफाश कराने का दावा कर रहे हैं, मगर प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने यह कहा कि अभी यह जानकारी नहीं मिली है कि हिरासत में लिए गए लोगों का कोई अपराधिक इतिहास है अथवा नहीं। पुलिस के इस रवैये से कमलेश के परिजनों में भयंकर नाराजगी है।
कमलेश की पत्नी ने कहा कि पुलिस की लापरवाही से उनके पति की हत्या हुई है। जब एटीएस ने यह इनपुट दे दिया था कि खतरनाक आतंकी संगठन कमलेश की हत्या करना चाहते हैं तो उनकी सुरक्षा पुख्ता करने की जगह ऐसा बुजुर्ग गनर दे दिया गया जो बीमार था और जिसके रिटायरमेंंट में कुछ ही दिन बचे थे। परिजनों की नाराजगी देखकर शासन में हडक़ंप मच गया है। आईजी और कमिश्नर ने परिजनों से बात की और सीएम से मुलाकात, लखनऊ में आवास और बेटे को नौकरी और सशस्त्र लाइसेंस देने की शर्त पर वह राजी हो गए।कार्यालय में घुसकर उनका बेरहमी से कत्ल कर दिया था।

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