भारत में भुखमरी और भोजन की बर्बादी

सवाल यह है कि दुनिया में खाद्यान्न उत्पादन में चीन के बाद दूसरे नंबर पर रहने वाले भारत में भुखमरी क्यों है? क्यों 19 करोड़ भारतीय रोज भूखे पेट सोने को मजबूर हैं? कल्याणकारी योजनाओं के बावजूद जरूरतमंदों तक भोजन क्यों नहीं पहुंच रहा है? भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए सरकार ठोस कदम क्यों नहीं उठा रही है? क्या जनता को जागरूक करने की जरूरत नहीं है?

Sanjay Sharma

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2019 में भारत 117 देशों में से 102वें पायदान पर है। भुखमरी और कुपोषण के मामले में भारत अपने पड़ोसी देशों नेपाल, बांग्लादेश व पाकिस्तान से भी पीछे है। आयरिश एजेंसी कंसर्न वल्र्डवाइड और जर्मन संगठन वेल्ट हंगर हिलफे द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में भारत में फैली भुखमरी को गंभीर बताया गया है। वहीं भारत में प्रति वर्ष उत्पादित होने वाले खाद्यान्न का काफी भाग बर्बाद हो जाता है। सवाल यह है कि दुनिया में खाद्यान्न उत्पादन में चीन के बाद दूसरे नंबर पर रहने वाले भारत में भुखमरी क्यों है? क्यों 19 करोड़ भारतीय रोज भूखे पेट सोने को मजबूर हैं? कल्याणकारी योजनाओं के बावजूद जरूरतमंदों तक भोजन क्यों नहीं पहुंच रहा है? भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए सरकार ठोस कदम क्यों नहीं उठा रही है? क्या जनता को जागरूक करने की जरूरत नहीं है? क्या लालफीताशाही की लापरवाही के कारण खाद्यान्न की बर्बादी हो रही है? क्या भूखे भारत से न्यू इंडिया का सपना साकार होगा?
खाद्य उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर भारत में भूखमरी की हकीकत बेहद गंभीर है। पर्याप्त खाद्यान्न के बावजूद भारत में पांच वर्ष से कम उम्र के तमाम बच्चे रोज भूख और कुपोषण से मर रहे हैं। भुखमरी की सबसे अधिक समस्या झारखंड, बिहार, यूपी, मध्य प्रदेश, गुजरात व महाराष्ट्र में हैं। हकीकत यह है कि भुखमरी की इस समस्या के लिए सरकार व जनता दोनों ही दोषी हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में खाद्यान्न उत्पादन का 40 फीसदी हर वर्ष बर्बाद हो जाता है। लिहाजा दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला भारत अपने ही नागरिकों को भोजन उपलब्ध करा पाने में नाकाम है। इसकी वजहें भी हैं। सही भंडारण नहीं होने से किसानों से खरीदा गया अन्न बर्बाद हो रहा है। सरकार के पास इस अन्न को रखने के लिए पर्याप्त भंडार गृह नहीं है। कई जगहों में खाद्यान्न को बोरियों में भरकर खुले में ही रख दिया जाता है। बारिश व नमी के कारण यह सड़ जाता है। वहीं आम आदमी भी भोजन बर्बाद करने में पीछे नहीं है। त्यौहार और अन्य मौकों पर लाखों टन भोजन फेंक दिया जाता है। खुले में सडऩे वाले इस भोजन से मीथेन गैस निकलती है। यह पर्यावरण की रक्षा करने वाली ओजोन परत के लिए काफी घातक होती है। जाहिर है यदि सरकार देश को भुखमरी और कुपोषण से बचाना चाहती है तो उसे न केवल खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी बल्कि जरूरतमंदों तक भोजन भी पहुंचाना होगा। इसके अलावा भोजन की बर्बादी को रोकने के लिए जनता में जागरूकता अभियान चलाना होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो भूखे भारत से न्यू इंडिया का सपना शायद ही साकार हो पाएगा।

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