मोदी-जिनपिंग वार्ता के निहितार्थ

सवाल यह है कि क्या यह वार्ता दोनों देशों के बीच सहयोग के नए युग का प्रारंभ है? पाकिस्तान का दोस्त चीन अचानक भारत को अहमियत क्यों देने लगा है? क्या ट्रेड वॉर से परेशान चीन अपनी खराब आर्थिक स्थिति का समाधान भारत में खोज रहा है? क्या धारा 370 की समाप्ति से उपजे नए राजनीतिक हालात से चीन दुविधा में है?

Sanjay Sharma

भारत और चीन के राष्टï्राध्यक्षों के बीच संपन्न हुई अनौपचारिक शिखर वार्ता कई मामलों में अहम रही। पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्टï्रपति शी जिनपिंग ने न केवल आतंकवाद पर अपना रुख साफ किया बल्कि आपसी विवादों को परे रखकर आर्थिक समेत अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। सवाल यह है कि क्या यह वार्ता दोनों देशों के बीच सहयोग के नए युग का प्रारंभ है? पाकिस्तान का दोस्त चीन अचानक भारत को अहमियत क्यों देने लगा है? क्या ट्रेड वॉर से परेशान चीन अपनी खराब आर्थिक स्थिति का समाधान भारत में खोज रहा है? क्या धारा 370 की समाप्ति से उपजे नए राजनीतिक हालात से चीन दुविधा में है? क्या चीन, दक्षिण चीन सागर में अपनी विस्तारवादी नीति के खिलाफ भारत को अपने विरोधियों के साथ जाने से रोकना चाहता है? क्या इसका असर भारत-अमेरिका के संबंधों पर पड़ेगा? क्या इसका असर पाकिस्तान के साथ वैश्विक कूटनीति पर भी पड़ेगा?
चीन और भारत के बीच संबंध उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। 1962 के युद्ध के बाद से दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली नहीं हो सकी है। चीन, भारत को घेरने के लिए हर दांव चलता रहा है। पाकिस्तान और नेपाल से चीन की बढ़ती दोस्ती उसकी इसी रणनीति का हिस्सा है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश पर भी चीन की नजर है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध प्रगाढ़ हो रहे हैं। भारत में चीन की सौ कंपनियां काम कर रही हैं और व्यापार का संतुलन उसकी ओर है। ऐसे समय जब पाकिस्तान से तनाव चरम पर है, चीन के राष्टï्रपति का भारत दौरा खास महत्व रखता है। सच यह है कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 खत्म होने से चीन परेशान है। उसे लगता है कि भारत पाक अधिकृत कश्मीर पर भी कब्जा कर लेगा। यहां चीन आर्थिक गलियारा बना रहा है और अरबों रुपये खर्च कर चुका है। यदि भारत ने यहां कब्जा कर लिया तो चीन के लिए समस्या हो जाएगी। वहीं अमेरिका से ट्रेड वॉर के चलते चीन की अर्थव्यवस्था में तीस फीसदी गिरावट आ चुकी है। चीन इसकी भरपाई भारत में अपना बाजार बढ़ाकर करना चाहता है। साथ ही चीन चाहता है कि दक्षिण चीन सागर में उसकी विस्तारवादी नीतियों का भारत विरोध न करें। यही वजह है कि जिनपिंग ने कश्मीर मुद्दे पर किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं की। चीन से बढ़ते आर्थिक सहयोग से भारत को व्यापार संतुलन बनाने में सहूलियत होगी। दोनों देशेां के बीच सीमा विवाद के शांति से सुलझने का रास्ता साफ होगा। इस वार्ता से भारत ने कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को पूरी तरह अलग-थलग कर दिया है। इसे भारत की कूटनीतिक विजय भी कही जा सकती है।

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