ऐसे तो गड्ढा मुक्त हो चुकीं शहर की सडक़ें, बजट की कमी से जूझ रहा निगम

  • बारिश के बाद शहर की 167 सडक़ें मिलीं बदहाल, लोगों का चलना हुआ मुश्किल
  • दस करोड़ की जरूरत पर पांच करोड़ का ही इंतजाम कर पाया नगर निगम
  • पैच वर्क से काम चलाने की तैयारी कर रहे जिम्मेदार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक इस बार बारिश के कारण शहर की 167 सडक़ें बदहाल हो चुकी हैं। इस सडक़ों पर इतने गड्ढे हो चुके हैं कि लोगों का सडक़ पर चलना मुश्किल हो गया है। जगह-जगह हो चुके गड्ढे हादसे का कारण बन रहे हैं तो दूसरी ओर इन सडक़ों की मरम्मत और निर्माण के लिए नगर निगम के पास पर्याप्त बजट का अभाव है। एक अनुमान के मुताबिक लगभग 140 किलोमीटर लंबी सडक़ पर गड्ढों को भरने के लिए पैच वर्क कराया जाए तो न्यूनतम दस करोड़ की जरूरत होगी। हालांकि नगर निगम के अफसरों ने सडक़ों की मरम्मत के लिए जर्नल हेड से पांच करोड़ की व्यवस्था की है लेकिन यह रकम काफी कम है। इस रकम से किसी तरह सडक़ों पर हो चुके गड्ढों का पैच वर्क कराया जाएगा।
शहर की लगभग 50 लाख की आबादी रोजाना सडक़ों पर हिचकोले खाने को मजबूर है। लखनऊ में आने वाले भी इन सडक़ों की बदहाली से परेशान हो रहे हैं। इस बार सडक़ों के गड्ढा मुक्त होने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा। बजट की कमी के कारण तमाम इलाकों की सडक़ों को गड्ढा मुक्त करना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती है। नगर निगम के सर्वे में अब तक 167 सडक़ें चयनित की गई हैं इनको या तो मरम्मत कराने या दोबारा बनाने की जरूरत है। नगर निगम के अभियंताओं की माने तो सभी सडक़ों को दुरुस्त कराने में करीब 30 करोड़ की आवश्यकता है। जो सडक़ें कम खराब हैं वहां पैच वर्क किया जाएगा लेकिन उसके लिए भी लगभग दस करोड़ की आवश्यकता होगी। पिछले वर्ष भी सडक़ों के पैचवर्क पर लगभग इतनी धनराशि खर्च हुई थी। कंगाल हो चुके नगर निगम के पास सडक़ों की मरम्मत के लिए बजट ही नहीं बचा है। जनरल हेड के 16 करोड़ से किसी तरह 5 करोड़ रुपए का इंतजाम हो पा रहा है। इससे कुछ सडक़ों का ही मरम्मत कार्य हो सकेगा। जिन सडक़ों की स्थिति ज्यादा खराब हो चुकी है उसके लिए उसे दोबारा बनाने की जरूरत होगी अगर नगर निगम को अवस्थापना या 14वें वित्त की धनराशि आवंटित की जाएगी तभी सडक़ों की सेहत सुधर पाएगी।

विकास निधि से नहीं मिलेगा पैसा
वैसे तो शहर की खस्ताहाल सडक़ों को लेकर आम जनता से लेकर पार्षद तक परेशान हंै, लेकिन सडक़ों की बदहाली दूर करने के लिए वार्ड विकास निधि नहीं मिलेगी। सडक़ों की मरम्मत के लिए वार्ड विकास निधि के लिए नगर निगम अफसरों ने पार्षदों से बात की थी लेकिन पार्षदों ने इससे इंकार कर दिया। पार्षदों ने साफ कह दिया कि नगर निगम अपनी निधि से सडक़ निर्माण कराएं क्योंकि पार्षदों को वार्ड विकास के लिए 95 लाख मिलते हैं उसमें सडक़ बन जाएगी तो और अन्य कार्य प्रभावित होंगे।

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