भारत-बांग्लादेश के बीच बढ़ती साझेदारी के मायने

सवाल यह है कि इन समझौतों का दोनों देशों पर क्या असर पड़ेगा? क्या ये करार दोनों देशों के विकास और अर्थव्यवस्था को और रफ्तार दे सकेंगे? क्या दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों का असर एशिया की कूटनीति पर पड़ेगा? क्या ये दोस्ती पड़ोसी पहले की भारतीय नीति का परिणाम है और इसका अन्य देशों पर सकारात्मक असर पड़ेगा?S

Sanjay Sharma

भारत-बांग्लादेश के बीच साझेदारी बढ़ती जा रही है। दोनों देशों के बीच सात करार किए गए। दोनों देशों के राष्टï्राध्यक्षों पीएम नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने संयुक्त रूप से तीन परियोजनाओं का शुभारंभ भी किया। बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं की घुसपैठ पर चर्चा हुई। सवाल यह है कि इन समझौतों का दोनों देशों पर क्या असर पड़ेगा? क्या ये करार दोनों देशों के विकास और अर्थव्यवस्था को और रफ्तार दे सकेंगे? क्या दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों का असर एशिया की कूटनीति पर पड़ेगा? क्या ये दोस्ती पड़ोसी पहले की भारतीय नीति का परिणाम है और इसका अन्य देशों पर सकारात्मक असर पड़ेगा? क्या घुसपैठ की समस्या के समाधान में बांग्लादेश सहयोग करेगा?
भारत और बांग्लादेश के संबंध मधुर रहे हैं। बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना भी भारत के साथ मधुर रिश्तों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। यही वजह है कि कुछ साल पहले दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को वार्ता के जरिए पूरी तरह हल कर दिया गया। आतंकवाद के मुद्दे पर बांग्लादेश भारत के साथ खड़ा रहा है। वह ऐलान कर चुका है कि बांग्लादेश की धरती से भारत में आतंकवाद के फैलाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि तिस्ता नदी जल बंटवारे को लेकर दोनों देशों में अभी कोई सर्वमान्य सहमति नहीं बनी है। बावजूद इसके दोनों देशों के संबंध प्रगति पर हैं। हाल में दोनों देशों के बीच जिन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं वे जल संसाधन, युवा मामले, संस्कृति, शिक्षा और तटीय निगरानी से संबंधित हैं। इसके अलावा एलपीजी निर्यात सहित तीन परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है। इसके चलते अब बांग्लादेश से एलपीजी का आयात पूर्वोत्तर के राज्यों को हो सकेगा। इससे एक ओर बांग्लादेश में आय व रोजगार में इजाफा होगा वहीं परिवहन की दूरी कम होने से भारत को इसका लाभ मिलेगा। भारत बांग्लादेश के औद्योगिक विकास के लिए कुशल मानव संसाधन व टेक्निशियन तैयार करेगी। इससे वहां औद्योगिक विकास की गति तेज हो सकेगी। दोनों देशों के बीच एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर शेख हसीना पहले ही सहयोग का आश्वासन दे चुकी हैं। इसमें दो राय नहीं है कि बांग्लादेश से बढ़ते संबंध न केवल पाकिस्तान पर कूटनीतिक और राजनीतिक रूप से असर डालेंगे बल्कि चीन की बांग्लादेश में प्रभाव बढ़ाने की नीति को भी नियंत्रित करेंगे। इसके अलावा यह अन्य पड़ोसी देशों के बीच भी भारत के प्रति एक सकारात्मक रवैया अपनाने का संदेश देगा। इससे भारत का तीव्र विकास होगा वहीं एशिया में शांति बरकरार रहेगी।

 

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