उपचुनाव: उल्टा पड़ा गठबंधन तोडऩे का दांव बसपा के सामने खुद को साबित करने की चुनौती

  • हमीरपुर नतीजे का 11 विधान सभा सीटों पर होने वाले चुनाव पर दिखेगा असर
  • बसपा प्रमुख मायावती के लिए आसान नहीं उपचुनाव की राह
  • नतीजे से चौकन्नी बसपा रणनीति बनाने में जुटी, कार्यकर्ताओं में जोश भरने की तैयारी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लोक सभा चुनाव के बाद बसपा प्रमुख मायावती को सपा से गठबंधन तोडऩे का दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है। यूपी में भाजपा के मुकाबले खुद को सामने रखने की बसपा की रणनीति पर हमीरपुर उपचुनाव नतीजे ने पानी फेर दिया है। यहां वह भाजपा प्रत्याशी से कहीं टक्कर लेती नहीं दिखी जबकि सपा प्रत्याशी ने जमकर टक्कर दी और दूसरे स्थान पर रहे। इस नतीजे का असर 11 विधान सभा में होने वाले उपचुनाव पर निश्चित तौर पर दिखेगा। हालांकि नतीजे से चौकन्नी बसपा खुद को साबित करने के लिए नए सिरे से रणनीति बनाने में जुटी है। चुनाव में भाजपा को कौन टक्कर देगा यह तो नतीजे आने के बाद पता चलेगा लेकिन यदि बसपा पीछे रही तो उसकी सियासत पर सवाल जरूर उठेंगे।
हमीरपुर उपचुनाव के नतीजे ने बसपा को जमीनी हकीकत दिखा दी है। यहां सपा के मुकाबले बसपा का वोट प्रतिशत काफी कम रहा है। चुनाव नतीजे में बसपा का प्रत्याशी तीसरे नंबर पर आया। इस नतीजे ने बसपा को जोर का झटका धीरे से दिया है। माना जा रहा है कि यदि बसपा प्रमुख ने लोक सभा चुनाव के बाद सपा के साथ गठबंधन नहीं तोड़ा होता तो नतीजे कुछ और हो सकते थे। गौरतलब है कि पिछले लोक सभा उपचुनाव में सपा-बसपा गठबंधन ने भाजपा को करारी शिकस्त दी थी। वहीं लोक सभा चुनाव परिणाम के बाद बसपा प्रमुख ने प्रदेश में भाजपा के मुकाबले खुद को खड़ा करने के लिए सपा से गठबंधन तोड़ लिया और अकेले चुनाव लडऩे का ऐलान किया। हमीरपुर चुनाव नतीजे ने मायावती के इस फैसले पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। नतीजे में बसपा चारों खाने चित हो गई। उसका प्रत्याशी कहीं भी भाजपा या सपा प्रत्याशी को टक्कर देता नहीं दिखा। हमीरपुर विधान सभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा के प्रत्याशी युवराज सिंह ने जीत दर्ज की। उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मनोज कुमार प्रजापति को करीब 17 हजार 846 वोटो से मात दी। हैरानी की बात यह है कि बसपा को इतना बड़ा झटका बुंदेलखंड में लगा है जहां उसका जनाधार बेहद मजबूत मान जाता था। इस नतीजे का दूर तक असर दिखेगा। अभी 11 विधान सभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। बसपा ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं लेकिन हमीरपुर के नतीजों को देखते हुए बसपा नेता चिंतित नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि बसपा प्रमुख और पार्टी के तमाम नेता नए सिरे से रणनीति बनाने में जुट गए है। साथ ही इस हार से उबरने के लिए वे कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश भी कर रहे हैं।

ईवीएम पर फोड़ा ठीकरा
हमीरपुर उपचुनाव में मिली करारी शिकस्त से बसपा को झटका लगा है। बसपा प्रमुख मायावती ने हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ा है। मायावती ने कहा कि भाजपा द्वारा ईवीएम की धांधली से चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का क्रम यूपी के हमीरपुर विधानसभा उपचुनाव में भी जारी रहा जबकि बारिश के कारण इनके वोटर निकले ही नहीं थे, यह सभी जानते हैं। अगर इनकी नीयत में खोट नहीं थी तो सभी 12 सीटों पर एक साथ उपचुनाव क्यों नहीं कराए गए। हमीरपुर उपचुनाव में बसपा को धांधली के तहत तीसरे नंबर पर धकेल कर अब अन्य 11 सीटों पर होने वाले विधान सभा उपचुनाव में पार्टी का मनोबल गिराने की साजिश की गई है, जो सफल नहीं होने वाली है।

भाजपा में शामिल हुए कई नेता
प्रदेश में बसपा नेताओं और समर्थकों के टूटने का दौर जारी है। पिछले दिनों पार्टी के कई बड़े नेता भाजपा में शामिल हुए। रामपुर मनिहारन के पूर्व विधायक और बसपा के पूर्व जोनल को-ऑर्डिनेटर रविंद्र कुमार मोल्हू को भाजपा मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। इसके अलावा सहारनपुर में बसपा के जिलाध्यक्ष ऋषिपाल गौतम ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। गंगोह विधान सभा क्षेत्र के अध्यक्ष धर्मेंद्र गौतम सहित बड़ी संख्या में समर्थकों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

 

 

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