बिना एलाइजा टेस्ट डेंगू की पुष्टिï करने वाले पैथालॉजी सेंटरों पर कसा शिकंजा, रद्द होगा पंजीकरण

  • सामान्य किट से जांच कर मरीज में कर रहे रोग की पुष्टिï
  • संचालक स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों को दिखा रहे ठेंगा
  • गाइड लाइन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग सख्त

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। एक ओर राजधानी में डेंगू अपने पांव तेजी से पसार रहा है वहीं पैथालॉजी सेंटर इस खौफ को और बढ़ा रहे हैं। ये सेंटर गाइड लाइन का उल्लंघन कर बिना एलाइजा टेस्ट के मरीजों में डेंगू की पुष्टिï कर रहे हैं। लिहाजा संदिग्ध रोगियों को भी डेंगू का मरीज मान लिया जा रहा है। लगातार बढ़ते आंकड़ों से स्वास्थ्य विभाग में हडक़ंप मच गया है और ऐसे सेंटरों पर शिकंजा कसने की तैयारी की गई है। अब गाइड लाइन का उल्लंघन करने वाले सेंटरों का पंजीकरण रद्द किया जाएगा। डेंगू के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। अब तक डेंगू से आधा दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है जबकि तीन सौ से अधिक लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। बारिश के बाद इनकी संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंकड़ों में इजाफे का एक कारण राजधानी के पैथालॉजी सेंटरों द्वारा सामान्य किट से जांच करना भी है जबकि सरकार की ओर से गाइड लाइन जारी की गई है कि कोई भी पैथालॉजी सेंंटर बिना एलाइजा टेस्ट के मरीज को संदिग्ध मान सकते हैं, उसे डेंगू का मरीज नहीं घोषित कर सकते हैं। बावजूद इसके राजधानी के सेंटर इस गाइड लाइन का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे संदिग्ध मरीज को भी डेंगू का मरीज मान लिया जाता है और आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं। हालत यह है कि यहां के तमाम निजी और सरकारी अस्पतालों में मरीजों की कतार बढ़ती जा रही है। कई मरीजों की मौत के कारण भी दहशत फैल रही है। हालत यह है कि सामान्य सर्दी-बुखार के मरीज भी डेंगू के डर से निजी पैथालाजी सेंटरों में महंगी जांच करा रहे हैं। ऐसे ही कुछ केस फैजुल्लागंज में सामने आए हैं। केशव नगर में कुछ मरीजों में निजी पैथोलॉजी सेंटर में डेंगू की पुष्टि की थी जबकि एलाइजा जांच के बाद उनमें डेंगू की पुष्टिï नहीं हुई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अपने तेवर सख्त कर लिए है। स्वाथ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि राजधानी में निजी पैथोलॉजी सेंटर डेंगू का खौफ बढ़ा रहे हैं। वे बिना प्रमाणिक जांच कराए मरीजों में डेंगू की पुष्टिï कर रहे हैं। इससे लोगों में दहशत पैदा हो रही है। ऐसे सेंंटरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

क्यों जरूरी है एलाइजा
डेंगू के लिए की जाने वाली यह एक ऐसी जांच है, जिसमें डेंगू की पुष्टि प्रमाणिक रूप से हो जाती है, जिससे डॉक्टर्स को मरीज का बेहतर तरीके से इलाज करने में आसानी होती है। एलाइजा टेस्ट में आईजीएम डेंगू के लक्षण सामने आने के लगभग 3 से 5 दिन के अंदर व आईजीजी 5 से 10 दिन के अंदर होता है। इसके परिणामों में सटीकता, जांच के समय पर आधारित होती है। मतलब समय रहते जांच करवाने पर डेंगू की पुष्टिï प्रमाणिक हो जाती है और इलाज भी बेहतर होता है। हालांकि चिकित्सक जांच रिपोर्ट आने के पहले लक्षणें के आधार पर प्राथमिक इलाज शुरू कर देते हैं जबकि गाइड लाइन के बाद एलाइजा जांच रिपोर्ट के बाद ही डेंगू की पुष्टिï करनी चाहिए।

मरीजों में हुआ इजाफा
सीएमओ कार्यालय के मुताबिक पिछले 15 दिनों में डेंगू के मरीजों में इजाफा हुआ है। रोजाना 10 से 15 लोगों में डेंगू की पुष्टिï हो रही है। यह पुष्टिï सीएमओ कार्यालय अपनी सरकारी लैब के आधार पर कर रहा है।

राजधानी में डेंगू का खौफ

डेंगू के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। अब तक डेंगू से आधा दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है जबकि तीन सौ से अधिक लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। बारिश के बाद इनकी संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बिना एलाइजा टेस्ट डेंगू की पुष्टिï करने वाले पैथालॉजी सेंटरों के खिलाफ पंजीकरण रद्द करने की संस्तुति की जाएगी। ये सेंटर सामान्य किट से जांच कर डेंगू की पुष्टिï कर सरकार की गाइड लाइन का उल्लंघन करने के साथ लोगों में भय भी पैदा कर रहे हैं।
-केपी त्रिपाठी, एडिशनल सीएमओ

 

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