बिगड़ गई अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट गोमती रिवर फ्रंट की सूरत

  • बदहाली की कहानी बयां कर रही नदी की तलहटी पर फैली जलकुंभी और गंदगी
  • जलीय जीवन पर भी मंडरा रहा खतरा, पानी में न्यूनतम हो चुका है ऑक्सीजन लेवल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। गोमती के प्रदूषण के चलते पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट गोमती रिवर फ्रंट बदहाल होता जा रहा है। देश का सबसे शानदार माना जाने वाला रिवर फ्रंट का नजारा गोमती नदी के प्रदूषण के चलते देखने लायक नहीं बचा है। नदी का पानी लगातार काला हो रहा है। नदी के किनारे उतराती गंदगी, जलकुंभी, प्लास्टिक की बोतलें और कूड़े से गोमती रिवर फ्रंट की सूरत खराब हो रही है। इसके अलावा गंदगी की मुख्य वजह यह भी है कि गोमती में गिरने वाले कई नालों का पानी बिना किसी ट्रीटमेंट गोमती में गिर रहा है। ऐसे में यह कहना गलत नही होगा कि गोमती नदी नाले में तब्दील हो गई है। गोमती रिवर फ्रंट के समीप नदी के कई हिस्से में जलकुंभी का प्रकोप है। इसकी गंदगी का लेवल बढ़ता जा रहा है।
गोमती नदी उत्तर प्रदेश की सबसे अधिक प्रदूषित नदी बन चुकी है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के आंकड़े के मुताबिक इस पूरे साल यानी 2019 के सभी महीनों में हालात खराब ही मिले है। जनवरी से जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक केवल कॉलीफोर्म ही नहीं पानी में जलीय जीवन बनाए रखने के लिए जरूरी घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा भी न्यूनतम हो गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलीय जीवन ही नदी के पानी के शुद्ध और प्रदूषणमुक्त होने का संकेत होता है। पानी में ऑक्सीजन नहीं होगी तो जलीय जीवन बच नहीं पाएगा। गोमती नदी का जन्मस्थान पीलीभीत है और मूल उद्गम स्थान पर अतिक्रमण होने लगा है। गोमती किसी ग्लेशियर का पानी लेकर नहीं चलती, यह भूजल की वजह से बनती है और उसी से रिचार्ज होकर नदी बन जाती है। पर, पीलीभीत में ही इसके उद्गम पर अवैध कब्जों ने इसकी सांसें रोकनी शुरू कर दी हैं।

बिना ट्रीटमेंट के नदी में गिर रहे नाले
गोमती नदी में कुल 37 नाले गिरते हैं। इनमें से 8 नाले ऐसे हैं जो शहर के बाहर गोमती में गिरते हैं। रिवर फ्रंट में कुछ वक्त पहले तक 29 नाले गिर रहे थे। दो साल के भीतर इसमें 9 नालों को समानांतर चैनल से जोड़ दिया गया है, जिससे अब 20 छोटे-बड़े नाले इस रिवर फ्रंट में गिर रहे हैं। गोमती रिवर फ्रंट में गिरने वाले दो बड़े नालों कुकरैल और हैदर कनाल भी काफी गंदा है जबकि नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे ब्रिज से पार होकर आने वाले नाले को अब तक चैनल से नहीं जोड़ा जा सका है। ट्रांस गोमती में अब भी 6 बड़े नाले गिर रहे हैं जिससे गोमती का प्रदूषण बना हुआ है।

पशुओं के शव भी बहकर पहुंच रहे गोमती में

गोमती में सीधे गिरने वाले नालों में शुमार कुकरैल नाले के किनारे हजारों की संख्या में पशुपालन हो रहा है। यहां अवैध डेयरियां हंै यहां मरने वाले जानवर बहकर गोमती में पहुंचते हैं। इसके अलावा गोबर और गंदगी का भी असर गोमती पर पड़ रहा है।

 

 

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