मनरेगा घोटाले को दबाने के लिए मृत श्रमिक का ‘डेथ सर्टिफिकेट’ बदलने की तैयारी!

  • देर रात तक खुला रहा ब्लाक कार्यालय, कर्मचारी खंगालते रहे अभिलेख
  • मौत के तीन दिन बाद तक श्रमिक से काम कराए जाने के खुलासे से हडक़ंप जिम्मेदार रच रहे साजिश

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
गोंडा। प्रदेश में गोंडा जिले के मुजेहना ब्लाक में मनरेगा श्रमिक की मौत के तीन दिन बाद तक उससे काम कराए जाने के खुलासे के बाद अफसर दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे घोटाले को ही दबाने में जुट गए हैं। इस मामले में अब मृतक श्रमिक का डेथ सर्टिफिकेट बदलने की तैयारी की जा रही है। ऐसा 4पीएम में ‘मौत के तीन दिन बाद तक मनरेगा में काम करता रहा श्रमिक’ खबर छपने के बाद और अपनी कुर्सी बचाने के मकसद से किया जा रहा है। इसी वजह से शुक्रवार को पूरे दिन इस घोटाले में शामिल लोगों को बचाने की कवायद होती रही। ब्लाक कार्यालय पर घोटाले से जुड़े जिम्मेदार किसी भी तरह की जांच से पहले ही अभिलेखों को खंगालकर उसे दुरुस्त करने में जुटे रहे। कसरत अभी भी जारी है।
मुजेहना ब्लाक के ग्राम पंचायत कौरहे में क्षेत्र पंचायत से कराए गए मिट्टी पटाई के कार्य में तीन दिन तक मृतक से काम कराए जाने का समाचार 4पीएम ने अपने गुरुवार के अंक में ‘मौत के तीन दिन बाद तक मनरेगा में काम करता रहा श्रमिक’ प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके तहत ब्लाक की एक अन्य ग्राम पंचायत बैजपुर के रहने वाले शमीम दर्जी नाम के मनरेगा श्रमिक से 10 अप्रैल से 25 अप्रैल तक मिट्टी पटाई का काम कराया जाना दर्शाया गया था। जबकि 23 अप्रैल को शमीम की मौत हो चुकी थी। इस मजदूर का डेथ सर्टिफिकेट भी ग्राम पंचायत अधिकारी की तरफ से जारी किया जा चुका है। बावजूद इसके जिम्मेदार लोगों ने न सिर्फ उसकी हाजिरी प्रमाणित की बल्कि उसको मजदूरी का भुगतान भी कर दिया गया। यह पूरा कारनामा मनरेगा में फर्जी श्रमिक के नाम से भुगतान लेने वाले गिरोह की शह पर अंजाम दिया गया। 4पीएम ने इस घपले का खुलासा किया तो घोटालेबाजों के पैरों से जमीन खिसक गई। आला अफसर इस मामले पर कोई जांच शुरू करें इसके पहले ही इस घोटाले को दबाने के लिए कसरत शुरू हो गई है।

कराई जा रही मामले की जांच: बीडीओ

इस संबंध में जब ब्लाक के बीडीओ व मनरेगा का काम देख रहे उपायुक्त श्रम एवं रोजगार हरिश्चंद्र राम प्रजापति के पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मुझे इस तरह के किसी मामले की कोई जानकारी नहीं है। लेकिन जल्द ही इस मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों को खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ब्लाक मुख्यालय पर डटे घोटालेबाज

मनरेगा में घोटाला करने वाले अधिकारी व कर्मचारी दो दिन से ब्लाक मुख्यालय पर डटे हैं। वे लगातार कागजातों में छेड़छाड़ करने की जुगत में हैं। इसी वजह से काम से जुड़े हाजिरी रजिस्टर व भुगतान के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अब इस घोटाले को दबाने के लिए मृतक श्रमिक शमीम दर्जी के डेथ सर्टिफिकेट को बदलने की तैयारी है। इसके लिए साजिश रची जा रही है। ब्लाक मुख्यालय पर शुक्रवार को क्षेत्र पंचायत के मनरेगा कार्य प्रभारी व लघु सिंचाई के अवर अभियंता से लेकर दोनों गांवों के ग्राम रोजगार सेवक, ग्राम प्रधान, ठेकेदार, बैजपुर के पूर्व प्रधान व मृतक शमीम के परिजन तलब रहे। मनरेगा घोटाले से जुड़े लोग मृतक श्रमिक के परिजनों पर उसका डेथ सर्टिफिकेट बदलवाने का दबाव बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसके लिए उन्हें कुछ प्रलोभन देकर उनसे इस आशय का शपथ पत्र मांगा जा रहा है कि शमीम की मौत 23 अप्रैल को नहीं बल्कि 29 अप्रैल को हुई है। इसी तारीख में डेथ सर्टिफिकेट जारी कराने की साजिश रची जा रही है।

अफसर-अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति समाप्त करने की तैयारी से हडक़ंप

  • विकास प्राधिकरणों में तैनात अफसर अभियंताओं की सूची तलब

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। विकास प्राधिकरण या फिर अन्य दूसरे विभागों में तैनाती लेने वाले निकाय अफसरों और अभियंताओं की प्रतिनियुक्ति समाप्त करने की तैयारी चल रही है। यही नहीं शासन स्तर पर ऐसे अफसरों और अभियंताओं की सूची तैयार की जा रही है। जो सालों से दूसरे विभागों में जमे हुए हैं।
नगर विकास विभाग की समीक्षा बैठक में पता चला कि निकायों में अफसरों और अभियंताओं की कमी है। बावजूद इसके अफसर दूसरे विभागों, खासकर विकास प्राधिकरणों में जाना पसंद करते हैं। जबकि निकायों में कार्यों की जिम्मेदारी अधिक है। अब ऐसे अफसरों की सूची तैयार करने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। हालांकि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है जब प्रतिनियुक्ति को लेकर शासन ने जानकारी मांगी हो।

अवैध घुसपैठियों को तलाशने में जुटी पुलिस

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राष्ट्रीय नागरिक पंजी. (एनआरसी) लागू किए जाने की सुगबुगाहट के बीच उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठियों की धरपकड़ के लिए अभियान शुरू हो गया है। पुलिस मुख्यालय से सभी जिलों को निर्देश मिलने के बाद राजधानी लखनऊ के अलावा अन्य जिलों में पुलिस बस्तियों और शहर के बाहरी इलाकों में रहने वालों से पूछताछ कर रही है। इन लोगों के दस्तावेज देखने के अलावा इन दस्तावेज को पाने के तरीकों की भी पड़ताल हो रही है।
बता दें, सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक इंटरव्यू के दौरान असम की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी एनआरसी लागू करने की जरूरत बताई थी। उसके बाद से लगातार एनआरसी को लेकर सुगबुगाहट मची हुई थी। इसी बीच पुलिस मुख्यालय से अवैध विदेशियों के खिलाफ अभियान चलाने को लेकर एक सर्कुलर जारी किया गया, जिसमें प्रदेश के सभी जिलों के बाहरी छोर पर स्थित रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, रोड के किनारे व उसके आसपास नई बस्तियों की पहचान किये जाने की बात कही गई है। पुलिस मुख्यालय ने आशंका जताई है कि इन जगहों पर बांग्लादेशी व अन्य विदेशी नागरिक अवैध रूप से शरण लेते हैं। ऐसे में सतर्कता के साथ सभी का वेरिफिकेशन करने और इस कार्य की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा अवैध रूप से रहने वाले विदेशी नागरिकों के फिंगर प्रिंट लेकर राज्य फिंगर प्रिंट ब्यूरो भेजा जाएगा। वहां ऐसे लोगों का कंप्यूटराइज्ड डाटा जिलावार रखा जाएगा। इस तरह पूरी पड़ताल के बाद अवैध विदेशी नागरिकों को पहचान कर उन्हें देश से निकालने के लिए गृह विभाग को भेजा जाएगा।

पुलिसकर्मियों को उपार्जित अवकाश के बदले नकद भुगतान करे सरकार: इरफान

  • कानपुर के सीसामऊ से ïिवधायक हाजी इरफान सोलंकी और मुरादाबाद के बिलारी से विधायक मोहम्मद फईम इरफान ने सीएम को लिखा लेटर
  • गृह जनपद या निकटवर्ती जनपद में तैनात पुलिसकर्मियों का मामला

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। समाजवादी पार्टी से कानपुर की सीसामई विधानसभा सीट से विधायक इरफान सोलंकी और मुरादाबाद की बिलारी विधानसभा सीट के विधायक मोहम्मद फईम इरफान ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख कर पुलिसकर्मियों को उपार्जित अवकाश के बदले नकद भुगतान कराने की मांग की है। साथ ही गृह जनपद या निकटवर्ती जनपद में तैनात पुलिसकर्मियों को पूर्व में मिलने वाली सुविधाओं का जिक्र करते हुए न्याय दिलाने की बात की है।
विधायकों ने पत्र में लिखा है कि उत्तर प्रदेश में तैनात पुलिस कर्मचारियों को उनके गृह जनपद के नजदीक नई तैनाती दी जानी चाहिए। साथ ही उन्हें उपार्जित अवकाश के बदले नकद भुगतान किया जाए। उन्होंने लिखा कि परिवार से दूर रहकर नौकरी करने वाला और अपने परिवार की बीमारी में देखभाल नहीं कर पाने की वजह से दुखी रहने वाला पुलिसकर्मी डिप्रेशन में रहकर आत्महत्या कर लेता है। इस तरह की घटनाएं आए दिन टीवी और अखबारों में देखने और पढऩे को मिलती हैं। इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री से निवेदन करते हुए कहा है कि इस मामले में सहानुभूति पूर्वक विचार कर जल्द से जल्द पुलिसकर्मियों के हित में नई व्यवस्था लागू करें।

 

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