जिस कुंभ की दुनिया भर में की गयी ब्रांडिंग उसी के काम के करोड़ों रुपये का भुगतान नहीं कर रहा सूचना विभाग

  • विज्ञापनों, होर्डिंग और फ्लैक्स से पट गया था प्रयागराज और लखनऊ
  • करोड़ों रुपये की प्रकाशित कराई गई थीं किताबें, मैगजीन और काफी टेबल बुक
  • भुगतान देने में आनाकानी कर रहा विभाग, प्रिंटरों के करोड़ों रुपये अटके
  • भव्य कुंभ का आयोजन था सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट

मुजाहिद जैदी
लखनऊ। कुंभ! शानदार कुंभ! दुनियाभर में कुंभ की ब्रांडिंग करने में सूचना विभाग ने कोई कसर नहीं छोड़ी। छोड़ते भी कैसे। मामला सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़ा था। कुंभ तो निपट गया मगर जिन लोगों ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए मेहनत की उन वेंडरों का करोड़ों रुपये का भुगतान दस महीने से नहीं हो पाया है। यह पूरे सिस्टम की एक बानगी भर है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जो प्रोजेक्ट खुद सीएम का सबसे प्रिय रहा हो अगर उस काम के भुगतान के लिए भी लोगों को दस महीने तक भटकना पड़े तो बाकी जगहों पर क्या होता होगा?
कुंभ की ब्रांडिंग के लिए पूरे यूपी में प्रचार-प्रसार के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए। पूरे सूबे में जगह-जगह होर्डिंग, बड़ी-बड़ी एलईडी, फ्लैक्स, कटआउट लगाए गए। हजारों जगह धुंआधार तरीके से हुए प्रचार से सभी लोग हतप्रभ थे। कोई समझ नहीं पा रहा था कि इन कामों में सरकार ने कितने करोड़ खर्च कर दिए होंगे। प्रयागराज और
लखनऊ तो मानो होर्डिंग से पट गए थे। जिधर देखो उधर कुंभ की भव्यता का अंदाजा लगाना मुश्किल हो रहा था।
सूचना विभाग ने इसके प्रचार-प्रसार के लिए करोड़ों रुपये के फोल्डर, किताबें, काफी टेबल बुक भी प्रकाशित कराईं। छोटी-छोटी कुंभ की किताबें करोड़ों लोगों तक पहुंचाई गईं। सूचना विभाग द्वारा छपवाया गया पंचांग तो बहुत ही चर्चा में रहा। विभाग की कोशिश रही कि प्रदेश के हर गांव तक यह सामग्री पहुंच जाए। पर अब दस महीने बाद प्रिंटर रो रहे हैं। उनका करोड़ों रुपये का भुगतान विभाग नहीं कर रहा है। यह भुगतान कब होगा यह बताने को भी कोई तैयार नहीं है। इसी तरह अखबारों और मैगजीनों तथा सोशल साइट्स पर विज्ञापन में करोड़ों खर्च किए गए मगर ये लोग भी अपने भुगतान के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इस संबंध में विभाग का कोई भी अधिकारी बताने को तैयार नहीं है कि यह भुगतान कब तक होगा।

अद्र्घकुंभ को कुंभ बनाकर पेश किया गया था। सरकार ने बड़ी-बड़ी बातें की थीं लेकिन आज वे सभी चीजें खोखली दिखाई दे रही हैं। जिन लोगों ने काम किया है उनका भुगतान उनको मिलना चाहिए। 4200 करोड़ का बजट आवंटित हुआ था वह कहां गया। यदि इस तरह की अनियमितता सामने आ रही है तो उसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। 
-आराधना मिश्रा, विधायक, कांग्रेस

यह केवल प्रचार-प्रसार की सरकार है। इन्होंने अभी तक कोई काम नहीं किया है और भ्रष्टïाचार चरम पर है। कुंभ में भ्रष्टïाचार की बातें सामने आई हैं।
-उदयवीर सिंह, एमएलसी, सपा

इस बारे में मुझे जानकारी नहीं है। आप संबंधित विभाग के अधिकारी से बात करें। तो आपको जानकारी मिल सकती है।
-हरीश श्रीवास्तव, प्रवक्ता, भाजपा

योगी सरकार दो-दो बार इन्वेस्टर समिट करा चुकी है, जिसका उद्देश्य प्रदेश में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देना बताया गया है। यदि सरकार खुद के धार्मिक आयोजन में काम कर चुके व्यापारियों का उत्पीडऩ करेगी, उनका भुगतान समय पर नहीं करेगी तो यह सरकार की नीयत और काबिलियत दोनों पर सवाल खड़े करता है। कुंभ में अनियमितताओं की बातें सामने आई हैं, जिनकी निष्पक्ष एजेंसी द्वारा जांच होनी चाहिए।
-वैभव माहेश्वरी, प्रवक्ता, आप

लखनऊ से दिल्ली दौड़ी देश की पहली कारपोरेट ट्रेन तेजस

  • सीएम बोले, आगरा से वाराणसी तक बने फास्ट ट्रैक कारीडोर
  • मुख्यमंत्री ने दिखाई हरी झंडी, चार सौ यात्री को लेकर सफर पर निकली ट्रेन
  • इको टूरिज्म वाले स्थानों पर चलनी चाहिए टॉय ट्रेन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज देश की पहली प्राइवेट (कॉरपोरेट) ट्रेन तेजस एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर लखनऊ जंक्शन से रवाना किया। लखनऊ से नई दिल्ली के बीच चलने वाली इस ट्रेन का संचालन इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन द्वारा किया जा रहा है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि समय के साथ तकनीक भी बदलती है। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से नयापन आता है। तेजस नयेपन की प्रतीक है। इसमें प्लेन जैसी सुविधाएं हैं। आगरा से वाराणसी तक फास्ट टै्रक कारीडोर भी बनना चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार जमीन का खर्च उठाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी पहली तेजस का गवाह बना है। अब लखनऊ से दिल्ली की यात्रा शानदार होगी। इको टूरिज्म स्थानों पर टॉय ट्रेन चलनी चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार पूरी मदद करेगी। पीएम मोदी ने कहा था कि देश में हवाई चप्पल पहनने वाला भी प्लेन में चलेगा। वह सपना पूरा हो रहा है। रेल का सफर सस्ता और सुरक्षित है। यह ट्रेन सिर्फ लखनऊ से दिल्ली तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। आगरा, वाराणसी व अन्य जगहों से भी चलनी चाहिए। इसमें 400 यात्री सफर के लिए रवाना हुए हैं।

कर्मचारियों ने निजीकरण का किया विरोध
एक ओर सीएम ने पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया वहीं दूसरी ओर रेल कर्मचारियों ने रेल के निजीकरण का विरोध किया। रेलकर्मियों ने स्टेशन पर विरोध प्रदर्शन किया।

 

 

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