कश्मीर पर चीन-पाक के एक सुर के मायने

सवाल यह है कि संयुक्त राष्टï्र के मंच से चीन ने कश्मीर मुद्दे को क्यों उछाला? भारत के आंतरिक मामलों में चीन दखल क्यों दे रहा है? क्या अमेरिका और भारत के मधुर संबंधों से चीन बौखला गया है? क्या पीओके में बने आर्थिक गलियारे के कारण चीन इस तरीके की पैंतरेबाजी कर रहा है? क्या इस तरह की बयानबाजी से दोनों देशों के रिश्तों में खटास नहीं आएगी?

Sanjay Sharma

संयुक्त राष्टï्र में चीन ने पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाते हुए कश्मीर मुद्दे का जिक्र किया। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि इस विवाद को यूएन चार्टर, सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों व द्विपक्षीय ढंग से शांति के साथ हल किया जाना चाहिए। सवाल यह है कि संयुक्त राष्टï्र के मंच से चीन ने कश्मीर मुद्दे को क्यों उछाला? भारत के आंतरिक मामलों में चीन दखल क्यों दे रहा है? क्या अमेरिका और भारत के मधुर संबंधों से चीन बौखला गया है? क्या पीओके में बने आर्थिक गलियारे के कारण चीन इस तरीके की पैंतरेबाजी कर रहा है? क्या इस तरह की बयानबाजी से दोनों देशों के रिश्तों में खटास नहीं बढ़ेगी? कश्मीर का जिक्र करने वाला चीन आतंकवाद पर चुप क्यों रहता है? क्या इसके जरिए वह दुनिया का ध्यान अपने विस्तारवादी नीतियों से हटाने के लिए कर रहा है?
भारत ने जब से जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को खत्म किया है, चीन और पाकिस्तान दोनों ही बौखला गए हैं। पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने पूरे विश्व में इस मामले को उठाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कहीं से समर्थन नहीं मिला। अमेरिका और रूस जैसी महाशक्तियों ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया। चीन ने इस मामले को संयुक्त राष्टï्र में ऐसे ही नहीं उठाया है। इसके पीछे उसके दीर्घकालिक लाभ छिपे हैं। चीन पाक अधिकृत कश्मीर में आर्थिक गलियारा बना रहा है। इस पर वह अरबों रुपये खर्च कर चुका हैं। चीन को लग रहा है कि यदि भारत ने पीओके पर कब्जा कर लिया तो उसकी आर्थिक गलियारे के जरिए भारत को घेरने की योजना पर पानी फिर जाएगा। इसके अलावा चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर चरम पर है। वहीं भारत और अमेरिका के संबंध बेहद मजबूत हो रहे हैं। ट्रेड वार के कारण चीन की आर्थिक हालत बिगड़ चुकी है। अमेरिका भी चीन को सबक सिखाने के मूड में नजर आ रहा है। लिहाजा, अमेरिकी कंपनियां चीन को छोडक़र भारत में निवेश की तैयारी कर रही हैं। चीन की नजर लद्दाख और अरुणाचल पर भी लगी हैं। वहीं चीन दक्षिण चीन सागर में विस्तारवादी नीतियों को अपना रहा है। संयुक्त राष्टï्र में कश्मीर का मुद्दा उठाकर वह अपनी विस्तारवादी नीति से विश्व के तमाम देशों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में भारत को चीन की चालाकियों से सतर्क रहना होगा। चीन को चेतावनी देने से काम नहीं चलेगा कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है और किसी भी देश को उसमें दखल देने का अधिकार नहीं है। भारत को भी चाहिए कि वह तिब्बत पर चीन के अवैध कब्जे और दक्षिण चीन सागर में उसकी विस्तावादी नीतियों को वैश्विक मंच से उठाए। ऐसा होते ही चीन घुटनों के बल आ जाएगा।

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