बेलगाम अपराधी और लाचार पुलिस

सवाल यह है कि अपराध पर सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति का असर प्रदेश में क्यों नहीं दिखाई दे रहा है? ताबड़तोड़ एनकाउंटर के बाद भी बदमाशों के मन में खाकी का खौफ क्यों नहीं पैदा हो रहा है? आए दिन लूट, हत्या, बलात्कार और अपहरण की वारदातें क्यों हो रही हैं? क्या पुलिस विभाग में व्याप्त लापरवाही और भ्रष्टïाचार के कारण स्थितियां बेकाबू होती जा रही हैं?

Sanjay Sharma

बिजनौर में अपराधियों ने दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया जबकि लखनऊ में एक महिला से दिनदहाड़े रूपये लूट लिए। वहीं सीतापुर में डेढ़ माह से अगवा अपनी पुत्री का पता नहीं लगने से क्षुब्ध होकर मां ने कोतवाली में खुदकुशी की कोशिश की। ये घटनाएं यह बताने के लिए काफी है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था किस राह पर जा रही है। सवाल यह है कि अपराध पर सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति का असर प्रदेश में क्यों नहीं दिखाई दे रहा है? ताबड़तोड़ एनकाउंटर के बाद भी बदमाशों के मन में खाकी का खौफ क्यों नहीं पैदा हो रहा है? आए दिन लूट, हत्या, बलात्कार और अपहरण की वारदातें क्यों हो रही हैं? क्या पुलिस विभाग में व्याप्त लापरवाही और भ्रष्टïाचार के कारण स्थितियां बेकाबू होती जा रही हैं? अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने में पुलिस नाकाम क्यों साबित हो रही है? क्या लचर खुफिया तंत्र के कारण अपराधियों का सुराग नहीं मिल पा रहा है? क्या बेहतर कानून व्यवस्था के बिना प्रदेश में निवेश को बढ़ाया जा सकेगा?
तमाम दावों के बावजूद प्रदेश में अपराध का ग्राफ कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अपराधी कहीं भी और कभी भी वारदातों को अंजाम देकर आराम से फरार हो रहे हैं। साइबर अपराधी भी तेजी से सक्रिय हैं। वे आए दिन लोगों को शिकार बना रहे हैं। महिलाओं के प्रति आपराधिक घटनाओं में इजाफा हुआ है। मित्र पुलिसिंग का दावा कोरा सपना बनकर रह गया है। पुलिसकर्मी वर्दी का रौब गांठ रहे हैं। कई बार ये पुलिसकर्मी बदमाशों के साथ मिलकर वारदातों को अंजाम देने से भी बाज नहीं आते हैं। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। थाने में एफआईआर लिखने में आनाकानी की जाती है। पुलिसकर्मी पीडि़त पर आरोपियों से समझौते का दबाव बनाती है। यही नहीं आरोपियों के साथ मिलीभगत कर पुलिसकर्मी हल्की धाराएं लगाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश करते हैं। इसके कारण अपराधी सलाखों के पीछे नहीं पहुंच पाता है। जघन्य मामलों में पुलिस की हालत और भी खराब है। वह अपराधी के सुराग के लिए सीसीटीवी के भरोसे है। खुफिया तंत्र पूरी तरह लचर हो चुका है। लिहाजा अपराधियों का पता नहीं चल पाता है। सच यह है कि विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार ने पुलिस तंत्र को करीब-करीब पंगु कर दिया है। यदि सरकार प्रदेश में कानून का राज स्थापित करना चाहती है तो उसे न केवल पुलिस तंत्र में आमूल सुधार करना होगा बल्कि स्थानीय खुफिया तंत्र को सक्रिय करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो प्रदेश में निवेशकों को लुभाना टेढ़ी खीर साबित होगा। यह स्थिति प्रदेश के विकास और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए घातक साबित होगी।

 

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