मोदी और ट्रंप की जुगलबंदी के मायने

सवाल यह है कि भारतीय पीएम के कार्यक्रम में अमेरिकी राष्टï्रपति की उपस्थिति के मायने क्या हैं? क्या ट्रंप ने अमेरिकी भारतीयों को रिझाने के लिए इसका इस्तेमाल किया? क्या चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी के कारण ट्रंप भारत के साथ पूर्ण सहयोग और दोस्ती का रिश्ता मजबूत करना चाहते हैं? क्या मंच से पीएम मोदी को पाकिस्तान के ऊपर कूटनीति की एक और सर्जिकल स्ट्राइक करने में सफलता मिली?

Sanjay Sharma

अमेरिका स्थित ह्यïूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में आयोजित हाउडी मोदी कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्टï्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जुगलबंदी फिर दिखाई दी। मेजबान मोदी ने 50 हजार लोगों के सामने न केवल मेहमान ट्रंप का जोरदार स्वागत किया बल्कि अबकी बार ट्रंप सरकार का नया नारा भी अमेरिकी जनता की ओर उछाल दिया। मोदी ने आतंकवाद व कश्मीर को लेकर पाकिस्तान को फटकारा। वहीं ट्रंप ने न केवल मोदी के कामों की तारीफ की बल्कि सभी क्षेत्रों में सहयोग करने और आतंकवाद से मिलकर लडऩे का ऐलान किया। सवाल यह है कि भारतीय पीएम के कार्यक्रम में अमेरिकी राष्टï्रपति की उपस्थिति के मायने क्या हैं? क्या ट्रंप ने अमेरिकी भारतीयों को रिझाने के लिए इसका इस्तेमाल किया? क्या चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती तनातनी के कारण ट्रंप भारत के साथ पूर्ण सहयोग और दोस्ती का रिश्ता मजबूत करना चाहते हैं? क्या मंच से पीएम मोदी को पाकिस्तान के ऊपर कूटनीति की एक और सर्जिकल स्ट्राइक करने में सफलता मिली? क्या अमेरिका व रूस जैसी महाशक्तियों को साध कर भारत आतंकवाद के खिलाफ एक ग्लोबल लड़ाई शुरू करने के मूड में है?
यह आयोजन कई मायनों में खास है। ऐसा पहली बार हुआ है जब भारत के राष्टï्राध्यक्ष के साथ अमेरिका के राष्टï्रपति ने सार्वजनिक मंच साझा किया। दोनों देशों के राष्टï्राध्यक्षों ने खुलकर बात की और विश्व के तमाम देशों को कूटनीतिक संदेश दिए। अमेरिका-चीन के बीच टे्रड वार चरम पर है। दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते दखल और पाक से उसकी गलबहियां से अमेरिका चिंतित है। ट्रंप जानते हैं कि चीन पर केवल भारत अंकुश लगा सकता है। लिहाजा ट्रंप ने न केवल मंच साझा किया बल्कि भारत में निवेश बढ़ाने से लेकर हर क्षेत्र में सहयोग का वादा भी किया। आतंकवाद के खिलाफ भारत का साथ देने की घोषणा की। ट्रंप का यह ऐलान पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ा देंगी। उसे अमेरिका से मिलने वाली आर्थिक मदद भी बंद हो सकती है। वहीं ट्रंप भारतीय अमेरिकों के सामने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाकर अगले साल होने वाले चुनाव में अपने लिए प्रचार करने में भी सफल रहे। भारत ने आतंक पर पाक को फिर बेनकाब किया। धारा 370 को अंदरूनी मामला बताकर पाकिस्तान की हवा निकाल दी है। भारत, अमेरिका-चीन के बीच चल रहे ट्रेड वार का भी फायदा उठाना चाहता है। मोदी ने मंच से कॉर्पोरेट टैक्स घटाने का जिक्र कर भारत में अमेरिकी कंपनियों को निवेश का खुला न्योता दिया। जाहिर है, मोदी और ट्रंप की यह जुगलबंदी दोनों देशों के लिए भविष्य में फायदेमंद साबित होगी।

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