राजधानी में घिसट रही आयुष्मान योजना निजी अस्पतालों का नहीं मिल रहा साथ

  • 1200 प्राइवेट अस्पतालों में महज 129 हुए पंजीकृत
  • शामिल अस्पताल भी गंभीर रोगियों को कर रहे रेफर
  • स्वास्थ्य विभाग भी योजना को नहीं बढ़ा पा रहा आगे

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वकांक्षी आयुष्मान योजना राजधानी में घिटस रही है। अधिकांश निजी अस्पताल इस योजना में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। महज दस फीसदी प्राइवेट अस्पताल ही इस योजना के तहत पंजीकरण करा सके हैं। यही नहीं पंजीकृत अस्पताल भी मरीजों को रेफर कर चलता कर देते हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट अस्पतालों को इस योजना में शामिल करने में नाकाम साबित हो रहा है।
राजधानी में करीब 1200 निजी अस्पताल हैं। इनमें केवल 129 अस्पताल ही आयुष्मान योजना में शामिल हैं। इसमें से 50 फीसदी से ज्यादा 30 बेड वाले हैं। वहीं सरकारी क्षेत्र में एसजीपीजीआई, केजीएमयू, लोहिया संस्थान सहित 30 अस्पताल पंजीकृत हैं। योजना में अब तक 13805 मरीजों का इलाज किया गया है। इसमें निजी अस्पताल की भागीदारी बेहद कम है। 129 अस्पतालों ने मिलकर अभी तक सिर्फ 7172 मरीजों का इलाज किया जबकि 30 सरकारी अस्पतालों ने 6633 मरीजों का इलाज किया जा चुका है। यही नहीं निजी अस्पताल गंभीर रोगियों का इलाज करने के बजाय उन्हें रेफर कर देते हैं। इसके पीछे निजी अस्पतालों के संचालक कभी योजना के पैकेज की कमी का हवाला देते हैं तो कभी कड़े नियमों कायदों की दुहाई देते हैं। फिलहाल राजधानी में पंजीकृत ज्यादातर मरीज सरकारी अस्पताल के हवाले हैं।

50 फीसदी लाभार्थियों को मिले गोल्डन कार्ड
योजना शुरू होने के करीब डेढ़ साल बाद भी राजधानी के आधे से अधिक लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड मुहैया नहीं कराया जा सका है। अभी तक 50 फीसदी लाभार्थियों को ही गोल्डन कार्ड मिल पाया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक लखनऊ में 279930 परिवार पंजीकृत हैं। इन परिवारों को 2011 की जनगणना के आर्थिक आधार पर शामिल किया गया है। इसमें 108609 परिवारों को गोल्डन कार्ड जारी कर दिया गया है। इसमें सूचीबद्ध अस्पतालों ने 86958 कार्ड व सुविधा केंद्रों ने 21651 कार्ड जारी किए हैं। बाकी बचे 172328 परिवारों को गोल्डन कार्ड बांटने के लिए आशा एवं एनएएनएम को लगाया गया है। इसके लिए सरकारी चिकित्सालयों पर शिविर भी लगाए जा रहे हैं।

क्या है योजना

योजना के तहत चयनित लाभार्थी परिवार को सालभर में पांच लाख तक का इलाज उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। यह लाभ परिवार के किसी भी सदस्य को मिलेगा। इसके लिए सरकारी और निजी अस्पताल पंजीकृत किए गए हैं। पंजीकृत अस्पताल में ही मरीज को योजना के तहत लाभ मिलेगा।

आयुष्मान योजना में निजी अस्पतालों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हंै। पंजीयन के लिए निजी अस्पताल के संचालकों की बैठकें कराई जा रही हैं। उन्हें इसके फायदे भी समझाए जा रहे हैं। योजना में उन्हीं अस्पतालों को शामिल किया जा रहा है, जो सभी मानकों को पूरा करते हैं।
-डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ

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