आतंक पर इमरान के कबूलनामे के निहितार्थ

सवाल यह है कि इमरान आतंकवाद का दोष अमेरिका पर क्यों मढ़ रहे हैं? क्या पाकिस्तान के हुक्मरान इतने नासमझ थे कि वे अपना भला-बुरा नहीं समझ पाए? क्या आतंकवाद के खात्मे के नाम पर पाक ने अमेरिका से आर्थिक व अन्य मदद नहीं ली? क्या जम्मू-कश्मीर में अमेरिका का साथ नहीं मिलने के कारण इमरान नया दांव चल रहे हैं?

SAnjay sharma

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कबूल कर लिया है कि उनके देश में कई आतंकी संगठन पैदा हुए और आतंकियों को टे्रनिंग भी दी गई। साथ ही यह भी बताया कि इसके लिए अमेरिका की गुप्तचर एजेंसी सीआईए ने पैसा दिया। वे मानते हैं कि आतंकवाद पाकिस्तान के लिए घातक सिद्ध हुआ। इसके कारण 70 हजार जानें गईं और 100 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। सवाल यह है कि इमरान आतंकवाद का दोष अमेरिका पर क्यों मढ़ रहे हैं? क्या पाकिस्तान के हुक्मरान इतने नासमझ थे कि वे अपना भला-बुरा नहीं समझ पाए? क्या आतंकवाद के खात्मे के नाम पर पाक ने अमेरिका से आर्थिक व अन्य मदद नहीं ली? क्या जम्मू-कश्मीर में अमेरिका का साथ नहीं मिलने के कारण इमरान नया दांव चल रहे हैं? यदि इमरान को आतंकवाद इतना ही घातक लग रहा है तो वे उसका खात्मा क्यों नहीं कर रहे हैं? क्यों दुनिया के खूंखार आतंकी पाकिस्तान में शरण लिए हुए हैं? क्या आतंकवाद का राग अलाप कर इमरान खुद को पीडि़त की तरह पेश करना चाहते हैं?
जम्मू-कश्मीर में धारा 370 की समाप्ति के बाद से पाकिस्तान बौखला गया है। इस मुद्दे का अंतरराष्टï्रीयकरण करने का पाकिस्तानी हुक्मरानों का मंसूबा ध्वस्त हो गया है। अमेरिका व रूस जैसी महाशक्तियों, संयुक्त राष्टï्र और अन्य देशों ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताते हुए दखल देने से इंकार कर दिया है। पाकिस्तान को इस बात का भी डर सता रहा है कि भारत पाक अधिकृत कश्मीर पर भी कब्जा कर लेगा। यही वजह है कि इमरान रोज नया पैंतरा बदल रहे हैं। अब वे आतंकवाद के नाम पर खुद को पीडि़त बताने में जुटे हैं। वे बड़ी चतुराई से इसका ठीकरा अमेरिका पर फोड़ रहे हैं जबकि दुनिया जानती है कि पाकिस्तान आतंकियों का पनाहगाह है। जब अमेरिकी राष्टï्रपति ट्रंप ने आतंक के नाम पर पाक के हाथों खेलने से इंकार कर दिया और आर्थिक मदद में कटौती कर दी तो इमरान ने अमेरिका को दोषी बताना शुरू कर दिया। इमरान यह भूल गए कि कुछ समय पहले तक वे खुद और उनके पूर्ववर्ती आतंकवादी संगठनों के अपने यहां होने से इंकार करते रहे हैं। अगर आतंकवाद से पाकिस्तान को नुकसान हो रहा है तो वे उसका खात्मा करने की जगह मसूद अजहर जैसे आतंकियों को क्यों पाल रहे हैं। पीओके में आतंकियों के लॉन्चिंग पैड क्यों तैयार किए जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के नाम पर मुस्लिमों को भडक़ाने और आतंकी हमलों की धमकी क्यों दी जा रही है। दरअसल, इमरान को डर है कि कहीं विश्व बिरादरी पाकिस्तान को आतंकी देश न घोषित कर दे। अगर ऐसा हुआ जिसकी संभावना बढ़ती जा रही है तो पाकिस्तान की बर्बादी तय है।

 

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