सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा के दावे फुस्स बढ़ीं छेड़छाड़ की वारदातें

  • छेड़छाड़ की घटनाओं में कर्मचारी और डॉक्टर भी लिप्त
  • जांच के नाम पर मामले को दबाने की होती है कोशिश
  • महिला तीमारदारों और मरीजों में फैल रही दहशत

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी के सरकारी अस्पतालों में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं रह गई है। यहां रेप से लेकर छेड़छाड़ की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि इन आपराधिक कृत्यों में अस्पताल के कर्मचारी और डॉक्टर भी शामिल हैं। वहीं जांच के नाम पर अस्पताल प्रशासन मामले को दबाने की कोशिश करता है। अस्पतालों में इस प्रकार के अपराधों से महिला मरीजों और तीमारदारों में दहशत फैल रही है।
राजधानी में कई नामचीन अस्पताल हैं। इन अस्पतालों में शहर के अलावा आस-पास से सैकड़ों लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। कई मरीजों के साथ महिला तीमारदार भी होती हैं। अस्पतालों में आपराधिक कृत्य बढऩे लगे हैं। केजीएमयू और बलरामपुर जैसे नामचीन अस्पताल में महिला मरीजों के साथ छेड़छाड़ और रेप जैसी घटनाएं घट चुकी है। इन घटनाओं ने अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। हालात यह है कि इन वारदातों को अंजाम देने में अस्पताल के कर्मचारी और डॉक्टर लिप्त पाए गए हैं। हाल में केजीएमयू में कैंसर पीडि़त का इलाज कराने आई एक महिला तीमारदार से रेजीडेंट डॉक्टर ने अश्लील हरकतें कीं। हैरानी की बात यह है कि इन घटनाओं को अस्पताल प्रशासन की ओर से दबाने की कोशिश की जाती है। जांच के बहाने मामले को दबाने का प्रयास तक किया जाता है। यह स्थिति तब है जब अस्पताल प्रशासन सुरक्षा के व्यापक इंतजाम के दावे कर रहे हैं। हकीकत यह है कि अधिकांश अस्पतालों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं है और न ही इन अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे ही लगे हैं। इसके कारण ऐसी घटनाओं में इजाफा हो रहा है। वहीं जिम्मेदार लापरवाह बने हुए हैं।

वारदातों का ब्यौरा

केस: 1
बलरामपुर में जुलाई 2015 में सफाई कर्मी रोहित कुमार शराब के नशे में वार्ड में घुस गया। महिला तीमारदार से छेड़छाड़ की। मामले के खुलासे के बाद सफाई कर्मी को नौकरी से निकाल दिया गया।
केस: 2
5 जुलाई 2019 को ठाकुरगंज स्थित संयुक्त टीबी अस्पताल में 12 वर्षीय किशोरी अपनी भाभी के साथ ओपीडी आई थी। उसके पेट में दर्द था। डॉक्टर ने यूरीन जांच लिखी। पीडि़ता का कहना था कि दीपक नामक एक व्यक्ति उसे यूरीन की जांच के बहाने बाथरूम ले गया और दरवाजा बंद कर लिया। इसके बाद वह उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा। किशोरी के चीखने पर लोग दौड़े तो दीपक दरवाजा खोलकर भाग खड़ा हुआ।

केस: 3
हाल में केजीएमयू में कैंसर पीडि़त पिता का इलाज करा रही बेटी के साथ रेजीडेन्ट डॉक्टर ने छेड़छाड़ की। पीडि़ता का आरोप है कि रेजिडेंट डॉक्टर वार्ड में आया। दवा लिखने के बहाने रेजिडेंट डॉक्टर ने उसे कमरे में बुलाया और अश्लील हरकतें करने लगा। केजीएमयू ने जांच के आदेश दिए है। आरोपी डॉक्टर को निलंबित कर दिया गया है।
केस: 4
केजीएमयू के शताब्दी भवन फेज टू में 31 मई 2017 को महिला तीमारदार के साथ रेप किया गया। महिला चीखती रही लेकिन अफसरों की नींद नहीं टूटी। मामले के तूल पकडऩे के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

अस्पतालों में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं बेहद गंभीर हैं। अस्पतालों में पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं, जिसके कारण स्थितियां खराब हो गई हैं। अस्पताल प्रशासन को इन घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा कमेटी गठित करनी चाहिए। साथ ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने चाहिए।
-सुमन रावत, अध्यक्ष, वुमेन पॉवर विंग

केजीएमयू में छेड़छाड़ की घटनाओं को लेकर अस्पताल प्रशासन बेहद सख्त है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती है। आगे इस प्रकार की घटना न हो इसके लिए पुख्ता रणनीति बनायी जा रही है।
डॉ. सुधीर सिंह, प्रवक्ता, केजीएमयू

 

 

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