प्लास्टिक से मुक्ति का संकल्प और सवाल

सवाल यह है कि क्या देश को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति मिल सकेगी? क्या पीएम की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक के प्रयोग को बंद करने की अपील सफल होगी? प्रतिबंधित पॉलीथिन का प्रयोग जारी क्यों है? क्या जनता के समर्थन के बिना यह संकल्प सार्थक हो पाएगा? क्या उत्पादन को रोके बिना प्रतिबंधित पॉलीथिन से मुक्ति पायी जा सकती है?

Sanjay Sharma

प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से सिंगल यूज प्लास्टिक से देश को मुक्त करने की अपील की है। यूपी समेत कई राज्यों में पॉलीथिन पर प्रतिबंध है। बावजूद इसके पॉलीथिन के कैरीबैग्स का प्रयोग धड़ल्ले से हो रहा है। सवाल यह है कि क्या देश को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्ति मिल सकेगी? क्या पीएम की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक के प्रयोग को बंद करने की अपील सफल होगी? प्रतिबंधित पॉलीथिन का प्रयोग जारी क्यों है? क्या जनता के समर्थन के बिना यह संकल्प सार्थक हो पाएगा? क्या उत्पादन को रोके बिना प्रतिबंधित पॉलीथिन से मुक्ति पायी जा सकती है? प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे हैं? क्या कड़े कानूनों का खौफ प्रतिबंधित पॉलीथिन के निर्माणकर्ताओं को नहीं है? क्या केवल खानापूर्ति के लिए अभियान चलाए जाते हैं?
प्लास्टिक कचरा एक जटिल समस्या बन चुका है। यह न केवल गंदगी का कारण है बल्कि पर्यावरण को भी प्रदूषित कर रहा है। पिछले वर्ष सरकार ने उत्तर प्रदेश में पचास माइक्रान से कम के पॉलीथिन के कैरीबैग्स पर प्रतिबंध लगा दिया है। राजधानी में नगर निगम को इसके खिलाफ अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। शुरुआत में निगम ने अभियान चलाया भी लेकिन जैसे ही मामला ठंडा पड़ा हालात पहले जैसे हो गए। प्रतिबंध के बावजूद राजधानी में इसका चोरी-छिपे निर्माण हो रहा है। इसके अलावा गुजरात और दिल्ली से यहां पॉलीथिन के कैरीबैग्स पहुंच रहे हैं। वहीं नगर निगम छापेमारी के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है। दूसरी ओर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इस मामले में गंभीर नहीं दिखाई पड़ रहा है। वह नोटिस जारी कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहा है। कचरे का उचित निस्तारण नहीं होने के कारण सफाई कर्मचारी सडक़ पर कूड़ा जला देते हैं। इस कूड़े में प्लास्टिक के कैरीबैग्स भी होते हैं। ये कैरीबैग्स जलने के दौरान घातक गैसें वातावरण में छोड़ते हैं। इसके अलावा ये कैरीबैग्स जमीन के अंदर वर्षों तक दबे रहते हैं। इसके कारण बारिश का पानी जमीन के अंदर नहीं जा पाता है। लिहाजा भूगर्भ जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। वहीं ये खेतों की उर्वरा शक्ति को भी नष्टï कर देते हैं। यदि सरकार देश और प्रदेश को सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त करना चाहती है तो उसे इसके निर्माण को रोकना होगा। साथ ही ऐसा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी। वहीं जनता को जागरूक करने के लिए सतत अभियान भी चलाना होगा। अन्यथा संकल्प को पूरा करना सपना ही रह जाएगा।

 

Loading...
Pin It

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Time limit is exhausted. Please reload the CAPTCHA.