अस्पतालों के बाल रोग वार्ड फुल मरीज हो रहे परेशान

  • एक ही बेड पर दो-दो बच्चों का हो रहा इलाज, दवाओं की भी कमी
  • वायरल बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ी, निजी अस्पताल में जाने को मजबूर रोगी

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। बदलते मौसम में रोगियों की कतार बढ़ती जा रही है। राजधानी के तमाम सरकारी अस्पतालों के बाल रोग वार्ड फुल हो गए हैं। हालत यह है कि एक ही बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है। वहीं अस्पतालों में दवाओं की भी कमी है। अस्पतालों में इलाज नहीं मिल पाने के कारण मरीज के परिजन निजी अस्पतालों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
अस्पतालों में वायरल बुखार और डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। सबसे ज्यादा बच्चे इन रोगों की चपेट में आ रहे हैं। राजधानी के अधिकांश बड़े सरकारी अस्पतालों में मरीजों की कतार लगातार बढ़ रही है। लिहाजा बेड की कमी हो गई है। बलरामपुर, लोहिया और सिविल समेत सभी सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी और बाल रोग वार्ड फुल हो गए हैं। कई अस्पतालों में एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है। बलरामपुर अस्पताल के बाल रोग वॉर्ड में 40 बेड हैं, लेकिन कई दिनों से यहां एक भी बेड खाली नहीं है। सुलतानपुर से आई हीरावती ने बताया कि उनके छह माह के बेटे को 15 दिनों से बुखार है। हीरावती उसे इलाज के लिए बलरामपुर अस्पताल लेकर आईं लेकिन यहां पर बाल रोग वार्ड में बेड खाली नहीं मिला। ऐसे में डॉक्टरों ने उसे दूसरे बच्चे के साथ भर्ती कर इलाज कर रहे हैं। यही हाल सिविल और लोहिया अस्पताल का है। यहां बाल रोग वार्ड फुल हैं। सोमवार को भी सिविल की बाल रोग इमरजेंसी बुखार से तप रहे बच्चों से भरी रही। इमरजेंसी के बाहर दिनभर बच्चों को गोद में लिए पहुंचे लोगों की कतार लगी रही। यहां भी शाम होते-होते बाल रोग इमरजेंसी फुल हो गई।

संक्रमण का खतरा
एक ही बेड पर दो-दो मरीजों के इलाज से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। बाजवूद इसके अस्पताल प्रशासन इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। वहीं गरीब मरीज निजी अस्पतालों में महंगा इलाज नहीं कराने के कारण अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं।

मौसम में बदलाव के कारण बच्चे बुखार, उल्टी और दस्त की चपेट में आ रहे हैं। अस्पताल में मरीजों को इलाज दिया जा रहा है।
डॉ. डीएस नेगी, निदेशक, सिविल अस्पताल

हमारे पास जो मरीज आ रहे हैं हम उसे भर्ती कर रहे हैं। आस-पास के जिलों से भी मरीज रेफर होकर आ रहे हैं।
-डॉ. राजीव लोचन, निदेशक, बलरामपुर

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