रूस-भारत के बीच हुए समझौतों के निहितार्थ

सवाल यह है कि क्या ये समझौते दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती का प्रतीक हैं? क्या इससे भारत के रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र के विकास पर असर पड़ेगा? क्या इन समझौतों का भारत और अमेरिका के संबंधों पर कोई विपरीत असर पड़ेगा? क्या रूस से पीएम मोदी ने पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर में हस्तक्षेप न करने का संदेश दिया है?

Sanjay Sharma

भारत-रूस दोस्ती की एक और इबारत लिखी गई। दोनों देशों aके बीच रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष समेत कई क्षेत्रों में एक दर्जन से अधिक बड़े समझौते हुए। साथ ही यह भी ऐलान किया गया कि दोनों देश किसी भी देश के आंतरिक मामले में दखल के खिलाफ हैं। सवाल यह है कि क्या ये समझौते दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती का प्रतीक हैं? क्या इससे भारत के रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र के विकास पर असर पड़ेगा? क्या इन समझौतों का भारत और अमेरिका के संबंधों पर कोई विपरीत असर पड़ेगा? क्या रूस से पीएम मोदी ने पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर में हस्तक्षेप न करने का संदेश दिया है? क्या आने वाले दिनों में अंतरिक्ष मिशन में रूस का बड़ा सहयोग भारत को मिलेगा? भारत से बढ़ते संबंधों से रूस की अर्थव्यवस्था को गति मिल सकेगी?
भारत और रूस की दोस्ती काफी पुरानी है और यह मजबूत होती जा रही है। राष्टï्रपति पुतिन भी भारत की दोस्ती को बेहद अहम मानते हैं। यही कारण है कि दोनों देश कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच लंबे अरसे से साझीदारी चली आ रही है। भारत रूस का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश है। व्यापार में भी काफी प्रगति हुई है। दोनों देशों के व्यापार में 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। खुद पुतिन भारतीय कंपनियों को रूस में निवेश के लिए आमंत्रित करते रहे हैं। हालिया समझौतों से दोनों देशों को लाभ होगा। अब गगनयान के लिए भारत के एस्ट्रोनॉट्स रूस में ट्रेनिंग ले सकेंगे। डिफेंस, न्यूक्लियर एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने पर भी सहमति बनी है। रक्षा जैसे क्षेत्र में रूसी उपकरणों के स्पेयर पाट्र्स दोनों देशों द्वारा साथ बनाने से इस उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। इसका असर दोनों देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। चेन्नई व व्लादिवोस्तोक के बीच समुद्री मार्ग तैयार होगा। भारत के एच-एनर्जी ग्लोबल लिमिटेड और रूस के नोवाटेक ने भारत और अन्य बाजारों में एलएनजी की आपूर्ति के लिए करार किया है। इससे भारत में रूसी कंपनियों के निवेश का रास्ता साफ हो जाएगा। वहीं कृषि, पर्यटन और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। न्यूक्लियर प्लांटों की स्थापना से आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट खत्म हो जाएगा। इसके अलावा दोनों देशों के राष्टï्राध्यक्षों ने साफ कर दिया है कि किसी भी देश द्वारा दूसरे देश के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस बयान से न केवल पाकिस्तान बल्कि चीन के सामने भी रूस ने अपना स्टैंड स्पष्टï कर दिया है। वहीं इन समझौतों ने साफ कर दिया है कि भारत, अमेरिका और रूस के बीच संतुलन साधने में कामयाब रहा है।

 

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