अपाचे के वायुसेना में शामिल होने के मायने

सवाल यह है कि इस लड़ाकू हेलीकॉप्टर के सेना में शामिल होने से क्या असर पड़ेगा? क्या यह भारतीय परिवेश में अपनी पूरी युद्धक्षमता दिखा सकेगा? क्या युद्ध और आतंकी हमलों के दौरान यह गेम चेंजर साबित होगा? क्या तेज गति से आक्रमण करने में अपाचे बेहतरीन रहेगा? क्या पड़ोसी देशों पर यह निर्णायक बढ़त ले सकेगा?

Sanjay Sharma

दुनिया का सबसे घातक अपाचे हेलीकॉप्टर वायुसेना के बेड़े में शामिल हो गया। 22 अपाचे हेलीकॉप्टर की खरीद की पहली खेप के तौर पर आठ हेलीकॉप्टर भारत पहुंच चुके हैं और इनको पठानकोट एयरबेस पर तैनात किया गया है। भारत ने अपाचे हेलीकॉप्टर की खरीद का करार अमेरिकी कंपनी बोइंग से की है। सवाल यह है कि इस लड़ाकू हेलीकॉप्टर के सेना में शामिल होने से क्या असर पड़ेगा? क्या यह भारतीय परिवेश में अपनी पूरी युद्ध क्षमता दिखा सकेगा? क्या युद्ध और आतंकी हमलों के दौरान यह गेम चेंजर साबित होगा? क्या तेज गति से आक्रमण करने में अपाचे बेहतरीन रहेगा? क्या पड़ोसी देशों पर यह निर्णायक बढ़त ले सकेगा? क्या इससे एशिया में युद्धक विमानों और हेलीकॉप्टर लेने की होड़ बढ़ेगी? भारत को इसे खरीदने की जरूरत क्यों पड़ी?
किसी भी देश की सुरक्षा सेना पर निर्भर करती है और इसके लिए उसका अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्रों से लैस होना जरूरी होता है। जहां तक भारत का सवाल है, यह दो तरफ से दुश्मन से घिरा है। पाकिस्तान और भारत के बीच चार और चीन से एक युद्ध हो चुका है। चीन और पाकिस्तान गहरे दोस्त हैं और भारत को घेरने की चालें चलते रहते हैं। पाकिस्तान सीमा पार से न केवल गोलीबारी करता है बल्कि जम्मू-कश्मीर समेत देश के अन्य हिस्सों में आतंकी गतिविधियों को संचालित करता रहता है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान स्थित बालाकोट के आतंकी ठिकानों पर हवाई हमला किया था। अब जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद पाकिस्तान परमाणु युद्ध की धमकी दे रहा है। आतंकी समूहों को सक्रिय कर रहा है। ऐसे में अपाचे गेमचेंजर साबित हो सकता है। कंपनी ने इसका निर्माण भारतीय परिवेश को ध्यान में रखकर किया है। यह किसी भी मौसम में पूरी क्षमता से मार कर सकता है। यह न केवल आतंकी ठिकानों को नष्टï कर सकता है बल्कि युद्ध के दौरान हवाई आक्रमण को धार दे सकता है। इसके वायुसेना में शामिल होने से तीव्र और प्रभावी तरीके से दुश्मन के ठिकानों पर हमला करना आसान हो जाएगा। अभी तक भारतीय सेना रूस निर्मित सुखोई एमआई-35 का इस्तेमाल कर रही है। अब यह हेलीकॉप्टर इसका स्थान लेगा। सेना इसे किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करेगी। इन्हें दो स्क्वॉड्रन में बांटा जाएगा। एक की तैनाती पठानकोट जबकि दूसरे को चीन के मद्देनजर असम के जोरहाट में तैनात किया जाएगा। कुल मिलाकर इससे भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता और घातक हो जाएगी। वहीं इससे पाकिस्तान और चीन, दोनों के मुकाबले भारत की सैन्य क्षमताओं में वृद्धि हो जाएगी।

 

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