स्प्रिंग डेवलपर ने अवैध निर्माण कर बेच दिए सैकड़ों फ्लैट, एलडीए व आवंटियों को लगी करोड़ों की चपत

  • विहित प्राधिकारी ने पहले दिया ध्वस्तीकरण का आदेश फिर वाद समाप्त कर फाइल दाखिल दफ्तर की
  • फैजाबाद रोड स्थित स्प्रिंग ग्रीन्स के अवैध अपार्टमेंट का मामला, एलडीए में बना चर्चा का विषय

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण की विहित प्राधिकारी कोर्ट के एक पूर्व पीठासीन अधिकारी का एक आदेश इन दिनों एलडीए में चर्चा का विषय बना हुआ है। फैजाबाद रोड स्थित अनौरा कला में स्प्रिंग डेवलपर के एक अवैध अपार्टमेंट को पहले उन्होंने ध्वस्त करने का आदेश दिया फिर अचानक मामले को रिकॉल किया और धारा-27 (1) की कार्रवाई को समाप्त कर फाइल दाखिल दफ्तर कर दी। इसके कारण एलडीए और आवंटियों को करोड़ों की चपत लगी हैं।
ताजा मामला फैजाबाद रोड स्थित स्प्रिंग ग्रीन्स अपार्टमेंट का है। जहां वर्ष 2012 में लखनऊ विकास प्राधिकरण के नियमों को ठेंगा दिखाते हुए स्प्रिंग डेवलपर ने ग्राम पंचायत से नक्शा पास कराया और दस बहुमंजिला इमारतें बना दीं। इसमें कुल 627 फ्लैट हैं। मामले की शिकायत एलडीए तक पहुंची तो अभियंताओं ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की। इसके बाद मामला विहित प्राधिकारी कोर्ट पहुंचा तो तत्कालीन पीठासीन अधिकारी ने दिसंबर 2016 में अपार्टमेंट के ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया। इस बीच बिल्डर ने फ्लैट बेंच डाले। फिर अचानक मामले को जनवरी 2017 में रिकॉल किया गया। यही नहीं फरवरी 2017 में विहित प्राधिकारी कोर्ट ने धारा-27 (1) की कार्रवाई को इस आधार पर समाप्त कर फाइल दाखिल दफ्तर कर दी गई कि सुनवाई के दौरान जोन-पांच के अभियंताओं द्वारा न ही कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की गई न ही कोई उपस्थित हुआ।
सूत्रों का कहना है कि ध्वस्तीकरण का आदेश पारित होने के बाद कमिश्नर के यहां अपील होनी थी लेकिन उसको निचले स्तर पर समाप्त कर दिया गया। वहीं इस मामले में एलडीए को अभी तक कंपाउडिंग मैप और अर्थदंड नहीं मिला है। एक अनुमान के मुताबिक एलडीए को करोड़ों का नुकसान हुआ है। फिलहाल इसकी जांच रिपोर्ट जोन पांच के अधिशासी अभियंता की ओर से संयुक्त सचिव डीएम कटियार को भेजी गई है।

ग्राम पंचायतों ने बढ़ाया विवाद

फैजाबाद रोड स्थित अनौरा कला का वर्ष 2000 में एलडीए की सीमा में आ गया था। वहीं 2009 में लखनऊ की सीमाओं पर स्थित 197 ग्राम पंचायतें एलडीए में शामिल की गई थीं। इन 197 पंचायतों में मानचित्र पास करने का अधिकार जिला पंचायत के हाथ से निकलकर एलडीए को मिल गया था, मगर साल 2015 तक जिला पंचायत नक्शे पास करता रहा। दोनों सरकारी एजेंसियों के बीच इस मुद्दे को लेकर विवाद बना रहा। शासन के आदेश के बाद जिला पंचायत ने नक्शे पास करना बंद कर दिया। छह साल में सैकड़ों की संख्या में अपार्टमेंट और कॅमर्शियल काम्प्लेक्स बना दिए गए।

निवासी हो रहे परेशान
मौजूदा समय में अपार्टमेंट के निवासियों ने आरडब्ल्यूए बनाने के लिए एलडीए को प्रार्थना पत्र दिया है लेकिन एलडीए से उसका नक्शा पास न होने के कारण पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने में दिक्कत आ रही है। इसके कारण स्थानीय निवासी परेशान हो रहे हैं।

 

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