अफवाह, मॉब लिंचिंग और सरकारी तंत्र

सवाल यह है कि बच्चा चोरी की अफवाहें क्यों उड़ाई जा रही हैं? प्रदेश में अचानक भीड़ इतनी उग्र क्यों हो गई है? क्या इसके पीछे कोई साजिश है? क्या रासुका लगाने का प्रावधान कर देने भर से इन घटनाओं पर लगाम लग सकेगी? क्या भीड़ की हिंसा और अफवाहों को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की जरूरत है? क्या भीड़ को कानून को हाथ में लेने की इजाजत दी जा सकती है?

Sanjay

प्रदेश में मॉब लिंचिंग की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। महिलाएं भी भीड़ का शिकार बन रही हैं। बच्चा चोर के शक में उग्र भीड़ अब तक कई निदोर्षों की जान ले चुकी है। कुछ गंभीर रूप से जख्मी हो गए हैं। सवाल यह है कि बच्चा चोरी की अफवाहें क्यों उड़ाई जा रही हैं? प्रदेश में अचानक भीड़ इतनी उग्र क्यों हो गई है? क्या इसके पीछे कोई साजिश है? क्या रासुका लगाने का प्रावधान कर देने भर से इन घटनाओं पर लगाम लग सकेगी? क्या भीड़ की हिंसा और अफवाहों को रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की जरूरत है? क्या भीड़ को कानून को हाथ में लेने की इजाजत दी जा सकती है? भीड़ की हिंसा रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को जमीन पर क्यों नहीं उतारा जा रहा है? क्या नागरिकों के जीवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है?
यूपी में इन दिनों बच्चा चोरी की अफवाहें लोगों के जीवन पर भारी पड़ रही हैं। भीड़ बिना तथ्यों की सही जानकारी के लोगों को पीट रही है। फतेहपुर के खेसहन गांव में भीड़ ने बच्चा चोरी के शक में स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ पहुंची एंबुलेंस को घेर लिया। कैराना में पांच महिलाओं और संभल में दो भाइयों को पीटा गया। इसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। ये घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि अफवाहों के कारण लोगों का जीवन संकट में पड़ गया है। पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह की घटनाओं में अब तक 36 मुकदमे दर्ज किए गए हैं जबकि सौ से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसे रोकने के लिए सरकार ने रासुका लगाने का फैसला लिया है। बावजूद इसके अफवाहों और मॉब लिंचिंग की घटनाएं पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। हैरानी की बात यह है कि लोग अफवाहों को सच मानकर हिंसा पर उतारू हो रहे हैं। इस मामले में पुलिस भी पस्त दिख रही है। अचानक अफवाहों का बाजार गर्म होने के पीछे किसी साजिश से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। मॉब लिंचिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी अपनी चिंता जता चुका है। कोर्ट ने इसको रोकने के लिए नोडल अधिकारियों और टास्क फोर्स के गठन का आदेश दिया था लेकिन इस मामले में केवल खानापूर्ति की गई। यदि सरकार मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकना चाहती है तो उसे न केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना होगा बल्कि अफवाहों पर भी लगाम लगानी होगी। इसके लिए सरकार को सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी। साथ ही लोगों को जागरूक भी करना होगा। यदि ऐसा नहीं हुआ तो प्रदेश में अराजकता का माहौल उत्पन्न हो जाएगा। यह सरकार और प्रदेश दोनों के हित में ठीक नहीं होगा।

 

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