प्रतिबंधित पॉलीथिन से मुक्ति कब?

सवाल यह है कि प्रतिबंध के बावजूद राजधानी समेत प्रदेश के तमाम शहरों में पॉलीथिन का प्रयोग क्यों हो रहा है? क्या सरकार की सख्ती के बाद ही संबंधित विभाग के अधिकारी सक्रिय होते हैं? एक साल पहले पॉलीथिन पर लगाए गए प्रतिबंध को आज तक अमलीजामा क्यों नहीं पहनाया जा सका? क्या केवल दुकानदारों पर नियंत्रण लगाने भर से पॉलीथिन के प्रयोग को रोका जा सकता है?

sanjasy sharma

्रदेश सरकार गांधी जयंती तक यूपी को प्रतिबंधित पॉलीथिन के प्रयोग से मुक्त करने का दावा कर रही है। इसके लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। अकेले लखनऊ में एक दिन में करीब आठ सौ किलो प्रतिबंधित पॉलीथिन के कैरीबैग्स बरामद किए गए। दुकानदारों पर जुर्माना लगाया गया। बावजूद इसके कई सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं। सवाल यह है कि प्रतिबंध के बावजूद राजधानी समेत प्रदेश के तमाम शहरों में पॉलीथिन का प्रयोग क्यों हो रहा है? क्या सरकार की सख्ती के बाद ही संबंधित विभाग के अधिकारी सक्रिय होते हैं? एक साल पहले पॉलीथिन पर लगाए गए प्रतिबंध को आज तक अमलीजामा क्यों नहीं पहनाया जा सका? क्या केवल दुकानदारों पर नियंत्रण लगाने भर से पॉलीथिन के प्रयोग को रोका जा सकता है? क्या पॉलीथिन उत्पादक कारखानों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत नहीं है? क्या जागरूकता के बिना इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है?
प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष पचास माइक्रान से कम के पॉलीथिन के कैरीबैग्स के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। साथ ही संबंधित विभागों को इस आदेश को जमीन पर उतारने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके पॉलीथिन के उत्पादन व बिक्री पर रोक नहीं लग सकी। दरअसल, सरकार के आदेश के बाद कुछ दिन तक राजधानी में पॉलीथिन जब्ती का अभियान चलाया गया लेकिन मामले के ठंडा पड़ते ही हालात पुराने ढर्रे पर लौट आए। हैरानी की बात यह है कि अफसरों ने न प्रतिबंधित पॉलीथिन के उत्पादक कारखानों के खिलाफ कार्रवाई की न दूसरे राज्यों से आने वाली पॉलीथिन कैरीबैग्स की आपूर्ति को रोका। लिहाजा दिल्ली व गुजरात से यहां पॉलीथिन कैरीबैग्स की बड़ी खेप पहुंच रही है। वहीं शहर में अवैध रूप से पॉलीथिन कैरीबैग्स का निर्माण जारी है। इन कैरीबैग्स को बाजार में खपाया जा रहा है। सिर्फ राजधानी में रोजाना 100 क्विंटल प्रतिबंधित पॉलीथिन की खपत हो रही है। प्रतिबंध का कोई असर नहीं दिख रहा है। अभियान के दौरान जब्त हो रहे पॉलीथिन के कैरीबैग्स इसकी पुष्टिï कर रहे हैं। जब प्रदेश की राजधानी में यह हाल है तो अन्य जिलों की स्थितियों का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। यदि सरकार प्रदेश को प्रतिबंधित पॉलीथिन के प्रयोग से मुक्त करना चाहती है तो उसे न केवल उत्पादक इकाइयों पर शिकंजा कसना होगा बल्कि दूसरे राज्यों से आ रही पॉलीथिन को भी रोकना होगा। इसके अलावा उसे जनता को पॉलीथिन के प्रयोग के नुकसान के बारे में भी जागरूक करना होगा। जिस दिन लोग इसका प्रयोग बंद कर देंगे, प्रदेश स्वत: ही पॉलीथिन मुक्त हो जाएगा।

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