सडक़ हादसे और टै्रफिक सिस्टम

सवाल यह है कि प्रदेश में लगातार हो रहे सडक़ हादसों के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या लचर टै्रफिक सिस्टम और लापरवाह पुलिस कर्मियों के कारण हादसों पर नियंत्रण लगाना मुश्किल हो गया है? क्या मानकों को धता बताकर बनायी गईं सडक़ें जानलेवा बन चुकी हैं? क्या अप्रशिक्षित चालक सडक़ों पर काल बनकर दौड़ रहे हैं?

Sanjay Sharma

शाहजहांपुर के पास दिल्ली-नेशनल हाईवे पर एक ट्रक ने टेंपो को टक्कर मार दी और पास से गुजर रही पिकअप पर पलट गया। इस हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हो गये। सवाल यह है कि प्रदेश में लगातार हो रहे सडक़ हादसों के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या लचर टै्रफिक सिस्टम और लापरवाह पुलिस कर्मियों के कारण हादसों पर नियंत्रण लगाना मुश्किल हो गया है? क्या मानकों को धता बताकर बनायी गईं सडक़ें जानलेवा बन चुकी हैं? क्या अप्रशिक्षित चालक सडक़ों पर काल बनकर दौड़ रहे हैं? क्या फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस और शराब पीकर गाड़ी चलाने के कारण हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है? क्या सडक़ सुरक्षा अभियान लोगों को जागरूक करने में नाकाम है? क्या हादसों को रोकने के लिए सरकार को नयी रणनीति बनाने की जरूरत है?
प्रदेश में सडक़ हादसों में इजाफा होता जा रहा है। हादसों में लोगों की जानें जा रही हैं। कई हमेशा के लिए विकलांग हो चुके हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे सडक़ सुरक्षा अभियान का भी कोई असर नहीं दिख रहा है। दरअसल, लचर टै्रफिक सिस्टम के चलते स्थितियां बेकाबू हो चुकी हैं। अधिकांश चौराहों पर टै्रफिक सिपाही नदारद रहते हैं। कई बार ये ओवरलोड वाहन चालकों से पैसा लेकर नो एंट्री में प्रवेश दे देते हैं। अधिकांश सडक़ों की हालत खस्ता है। सडक़ निर्माण में भ्रष्टïाचार का घुन लग चुका है। घटिया निर्माण के कारण तमाम सडक़ें एक बारिश में ही गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं और हादसों को न्योता देती है। सडक़ों में पड़े गड्ढों से होने वाली मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट भी अपनी चिंता जता चुका है। बावजूद इसके सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। बिना प्रशिक्षण के सडक़ों पर फर्राटा भर रहे वाहन चालक भी हादसों की वजह बन रहे हैं। ये चालक फर्जी तरीके से ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लेते हैं और टै्रफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं। पुलिस भी खानापूर्ति के लिए कभी-कभी चेकिंग अभियान चलाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेती है। अधिकांश चालक सडक़ों पर लिखे टै्रफिक के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करते हैं। हाईवे पर स्थितियां और भी बदतर हैं। यहां चालक निर्धारित गति से अधिक तेजी से वाहन चलाते हैं। इसके कारण हादसों में बढ़ोतरी जारी है। सरकार यदि सडक़ हादसों पर नियंत्रण लगाना चाहती है तो उसे न केवल मानकों के मुताबिक सडक़ों का निर्माण कराना सुनिश्चित करना होगा बल्कि टै्रफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी करनी होगी। इसके अलावा लोगों को जागरूक करने के लिए सतत अभियान चलाना होगा। साथ ही फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस पर भी शिकंजा कसना होगा।

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