बदमाशों के सामने राजधानी की हाईटेक पुलिस पस्त, कई वारदातों का नहीं हुआ खुलासा

  • तारिक हत्याकांड के बीस माह बाद भी नहीं मिला हत्यारों का सुराग
  • गोमती नगर में बदमाशों ने दिया था वारदात को अंजाम, मुन्ना बजरंगी का था करीबी
  • कई अन्य वारदातों का भी पर्दाफाश करने में नाकाम रही पुलिस

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी की हाईटेक पुलिस बदमाशों के सामने पस्त नजर आ रही है। अपराधी लगातार वारदातों को अंजाम देकर फरार हो रहे हैं लेकिन पुलिस उनका सुराग तक नहीं लगा पा रही है। हालत यह है कि कई संगीन वारदातें आज भी पुलिस की फाइलों में खुलासे का इंतजार कर रही हैं। वर्ष 2017 में हुई तारिक हत्याकांड के आरोपियों तक भी पुलिस नहीं पहुंच पाई है। यह स्थिति तब है जब सरकार अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलने के निर्देश दे चुकी है।
छोटी-मोटी वारदातों को छोड़ दें तो लखनऊ की पुलिस बड़ी वारदातों के खुलासे में फिसड्डी साबित हो रही है। एक दिसंबर 2017 को गोमती नगर थाना क्षेत्र के ग्वारी गांव के पास बाइक सवार बदमाशों ने मोहम्मद तारिक को गोलियों से छलनी कर दिया था। मोहम्मद तारिक गोमतीनगर विस्तार के एक अपार्टमेंट में रहता था। बदमाशों ने उस पर तब हमला किया जब वह शाम करीब साढ़े पांच बजे फाच्र्यूनर गाड़ी से ग्वारी ओवर ब्रिज के रास्ते दयाल पैराडाइज चौराहे की ओर जा रहा था। पहले से घात लगाए बदमाशों ने ओवर ब्रिज पर चढऩे से पहले ही उसे रोकने का प्रयास किया। बदमाशों को देखकर तारिक ने गाड़ी की रफ्तार बढ़ा दी, जिस पर बदमाश उनका पीछा करने लगे। तारिक कुछ समझ पाता इससे पहले ही हमलावरों ने उस पर गोलियां चलानी शुरू कर दी। हमलावरों ने फाच्र्यूनर के पहिए में गोली मार दी। इससे पहिया दग गया और गाड़ी अनियंत्रित होकर ब्रिज के रेलिंग से टकरा कर रुक गई। गोली लगने से गाड़ी के पहिए में आग भी लग गई। इसके बाद बदमाशों ने तारिक के पास जाकर उसे गोली मार दी और भाग निकले। तारिक रेलवे, परिवहन के अलावा प्रापर्टी समेत अन्य का काम करता था और वह माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी का करीबी था। इस मामले में पुलिस ने कई टीमें गठित की। काफी जांच-पड़ताल की गई लेकिन आज तक हत्यारों का सुराग नहीं मिल सका। तारिक हत्याकांड पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी बाइक सवार बदमाश सरेराह कई लोगों की हत्याकर पुलिस को चुनौती दे चुके हैं। इनमें कई का खुलासा आज तक नहीं हो सका है। हैरानी की बात यह है कि इस तरह की वारदातों पर पुलिस अधिकारी एक ही रटा-रटाया जवाब देते हैं कि पुलिस टीमें कातिलों की तलाश में जुटी हुई है और वे जल्द ही सलाखों के पीछे होंगे।

केस: 1
हुसैनगंज कोतवाली क्षेत्र में 12 जून 2011 को शहर के प्रतिष्ठित चश्मा व्यावसाई गुलाब टेक चंदानी अमीनाबाद से दुकान बंद करने के बाद अपने स्कूटर से चारबाग स्थित खम्मन पीर बाबा की मजार पर गए थे। वहां से लौटते समय बाइक सवार बदमाशों ने उन्हें रोक लिया। बदमाशों ने गोलीमार कर उनकी हत्या कर दी। इस हाई प्रोफाइल हत्याकांड के खुलासे के लिए पुलिस टीमों को लखनऊ समेत आसपास के जिलों में रवाना किया गया, लेकिन पुलिस कातिलों का सुराग लगाना तो दूर हत्या करने के कारण का भी पता नहीं लगा पाई।
केस: 2
वर्ष 2012 में गुडम्बा थाना क्षेत्र के कल्याणपुर निवासी राजकीय जुबली इंटर कॉलेज से सेवानिवृत्त श्याम सुंदर यादव की उनके ही घर में गला रेतकर हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने करीब एक दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की लेकिन आज तक इसका राजफाश नहीं हो सका।
केस: 3
गोमतीनगर थाना क्षेत्र में 25 फरवरी 2013 को ग्वारी गांव निवासी सतीश की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बदमाशों ने घटना को उस समय अंजाम दिया जब सतीश अपनी पत्नी अंजलि के साथ बाइक से घर लौट रहा था। पुलिस ने इस मामले में कई लोगों से पूछताछ की और जल्द पर्दाफाश का दावा भी किया लेकिन आज तक मामला अधर में है। पुलिस यह बताने में असमर्थ रही कि हत्या का कारण क्या था।

 

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