बढ़ते अपराध और लचर पुलिस तंत्र

  • सवाल यह है कि ताबड़तोड़ एनकाउंटर के बावजूद प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद क्यों हैं? क्या बदमाशों के ऊपर खाकी का खौफ खत्म हो गया है? क्या पुलिस की लापरवाह कार्य प्रणाली के कारण अपराधों के ग्राफ में इजाफा हो रहा है? क्या पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार ने स्थितियों को बेकाबू कर दिया है? क्या अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति नाकाम हो गई है?

Sanjay Sharma

बदमाशों ने एक ही दिन में सहारनपुर में दो और प्रयागराज में छह लोगों की हत्या कर दी। ये घटनाएं यह बताने के लिए काफी हंै कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था किधर जा रही है। इसने पुलिस तंत्र के सुरक्षा दावों और उसकी कार्यप्रणाली की भी पोल खोल दी है। सवाल यह है कि ताबड़तोड़ एनकाउंटर के बावजूद प्रदेश में अपराधियों के हौसले बुलंद क्यों हैं? क्या बदमाशों के ऊपर खाकी का खौफ खत्म हो गया है? क्या पुलिस की लापरवाह कार्य प्रणाली के कारण अपराधों के ग्राफ में इजाफा हो रहा है? क्या पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टïाचार ने स्थितियों को बेकाबू कर दिया है? क्या अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति नाकाम हो गई है? क्या बिगड़ती कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने की जिम्मेदारी सरकार की नहीं है? क्या पुलिस और अपराधियों का गठजोड़ अपराधों को बढ़ा रहा है? क्या बढ़ते अपराध प्रदेश के विकास में बाधक नहीं साबित होंगे?
सहारनपुर और प्रयागराज की वारदातें बानगी भर हैं। पूरे प्रदेश में अपराधों का ग्राफ बढ़ रहा है। आए दिन हत्या, बलात्कार, लूट और डकैती की वारदातें हो रही हैं। महिलाओं का अकेले घर से बाहर निकलना मुश्किल होता जा रहा है। सरकार की अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति और ताबड़तोड़ एनकाउंटर भी बेअसर हो चुके हैं। इस सबके लिए पुलिस का रवैया जिम्मेदार है। कई बार पुलिस खुद अपराधियों के साथ मिलकर अपराधों को अंजाम देती है। ऐसे कई केस सामने आ चुके हैं। पुलिस पीडि़तों पर दबाव बनाकर आरोपियों से समझौता कराने से भी बाज नहीं आती है। कई बार वह केस को इस कदर कमजोर कर देती है कि अपराधी को सलाखों के पीछे पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय खुफिया तंत्र ध्वस्त हो चुका है। लिहाजा बड़ी वारदातों की पूर्व जानकारी और अपराधियों का सुराग नहीं मिल पाता है। दूसरी ओर पुलिसकर्मी तमाम कवायदों और हिदायतों के बावजूद नागरिकों के साथ बेहतर संवाद नहीं कायम कर सके हैं। नागरिक अपराधियों के बारे में सीधे तौर पर पुलिस को जानकारी देने से बचते हैं। चर्चित मामलों में पुलिस गवाहों को सुरक्षा तक नहीं मुहैया करा पाती है। इसके कारण अपराधी कानूनी शिकंजे से बच जाते हैं। यदि सरकार प्रदेश में कानून का राज कायम करना चाहती है तो उसे न केवल पुलिस तंत्र में व्याप्त भ्रष्टïाचार बल्कि पुलिस और अपराधियों के गठजोड़ को भी समाप्त करना होगा। सरकार को दागी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी होगी। साथ ही स्थानीय खुफिया तंत्र को मजबूत करना होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो प्रदेश में विदेशी निवेश को भी झटका लग सकता है। इसका सीधा असर प्रदेश के विकास पर पड़ेगा।

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