ठंडे बस्ते में गई चटोरी गली को गुलजार करने की योजना

  • 33 करोड़ खर्च कर बनवाई गई थी गली
  • पर्यटकों को उपलब्ध कराना था लखनवी जायका
  • पर्यटन विभाग ने खड़े किए हाथ, करोड़ों पानी में बहे

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। गोमती नगर के चहल-पहल वाले इलाकों के बीच सालों पहले बनी चटोरी गली में आज भी सन्नाटा कायम है। नौ साल पहले करीब 33 करोड़ के खर्च से बनी चटोरी गली को गुलजार करने की सारी कोशिशें अब बंद हो गई हैं। भीड़, गंदगी, सुरक्षा और जाम की दलील देकर यहां बनी दुकानों को संचालित करने की योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
गोमती नगर स्थित सामाजिक परिवर्तन स्थल के पास चटोरी गली को 2011 में 33 करोड़ की लागत से बनाया गया था। यहां बनीं दुकानों के संचालन का जिम्मा पर्यटन विभाग को दिया गया था। इसमें 10 दुकानों के अलावा फाउंटेन, पार्किंग और जनसुविधा केंद्र भी हैं। चटोरी गली की दुकानों को किराये पर देने या इन्हें लॉटरी के जरिये आवंटित करने की तैयारी पिछले दो साल तक की गई थी। इसके लिए सचिव और स्मारक समिति प्रबंधन ने प्रस्ताव भी बनाए थे। गली की दुकानें और इको गार्डेन में बने रेस्टोरेंट के संचालन का जिम्मा निजी हाथों को देने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। सभी को व्यवस्थित करने के लिए एलडीए सचिव की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने टेंडर करने का फैसला किया था मगर जाम और गंदगी को देखते हुए गली की दुकानों को नहीं खोला गया। तय योजना के मुताबिक यहां चाइनीज, फास्ट फूड, आइसक्रीम, छोले-भटूरे और कबाब जैसी लखनवी जायके वाली खान-पान की चीजें बिकनी थीं। बावजूद इसके पर्यटन विभाग ने हाथ खड़े कर दिए और 2017 की जनवरी में सभी दुकानें स्मारक समिति को वापस कर दी गईं। दो बार टेंडर किए गए मगर केवल एक ही संचालक को जिम्मा देने के नियम के चलते टेंडर नहीं किए जा सके।

इन्हें मिलना था मौका
चटोरी गली शुरु करने के लिए एलडीए ने लखनवी जायके की पहचान बन चुके 30 से ज्यादा ब्रैंड और दुकानों की सूची भी बनाई थी। कंपनी को इन्हीं ब्रैंड को दुकानें आवंटित करनी थी। इस सूची में ईदरीस, लल्ला, जीशान, वाहिद, टुंडे और अवध की बिरयानी, वाजपेयी की पूड़ी, रहीम की निहारी, राजा ठंडई, श्री लस्सी कॉर्नर, शर्मा टी कॉर्नर, प्रकाश कुल्फी, जीपीओ का दही बड़ा, स्टेडियम पान, दस्तरख्वान और बृज की रसोई समेत कई रेस्तरां शामिल किए गए थे।

 

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