डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था बेपटरी

  • शत प्रतिशत कूड़ा कलेक्शन में नाकाम ईको ग्रीन कंपनी
  • खाली प्लॉट में फेंका जा रहा कूड़ा हर जगह बिखरी है गंदगी
  • नगर निगम की बैठक में पार्षद कई बार उठा चुके हैं मामला

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। राजधानी में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था पटरी से उतर गई है। लोग खाली प्लॉटों में कूड़े का निस्तारण कर रहे हैं। सडक़ से लेकर गलियों तक में कूड़े का ढेर लगा रहता है। यह स्थिति तब है जब नगर निगम की बैठक में पार्षद इस मामले को लेकर कई बार सवाल उठा चुके हैं। वहीं जिम्मेदार इस मामले को लेकर लापरवाही बरत रहे हैं।
शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था आज तक पटरी पर नहीं आ सकी है। कूड़ा कलेक्शन की जिम्मेदारी ईको ग्रीन कंपनी को सौंपी गई है। नगर निगम के सदन में लगभग सभी वार्डो के पार्षदों ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को लेकर कई बार सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई है कि उनके वार्ड के किसी भी मोहल्ले से कूड़ा नहीं उठता है। पार्षदों ने मांग रखी थी कि कंपनी को हटाने के लिए शासन को पत्र लिखा जाए। इस पर मेयर ने उन्हें आश्वस्त किया था कि शासन को पत्र लिखा जाएगा। हालांकि निगम प्रशासन ने फैसला लिया है कि अंतिम बार कंपनी को तीन माह का समय दिया जाए। इस अवधि में कंपनी को हर हाल में शत प्रतिशत घरों से कूड़ा कलेक्शन का कार्य करना होगा। अगर ऐसा न हुआ तो सख्त एक्शन लिया जाएगा। नगर निगम की ओर से स्पष्ट किया गया है कि संकरी गलियों में बने घरों से भी कूड़ा कलेक्शन करना होगा। अभी इन जगहों से कूड़ा नहीं कलेक्ट किया जाता है, जिससे लोग सडक़ या फिर खाली प्लॉट में कूड़ा फेंकने को मजबूर हैं। निगम प्रशासन ने कंपनी को यह भी निर्देश दिया है कि शत प्रतिशत घरों से कूड़ा कलेक्शन के साथ ही अधिक से अधिक यूजर चार्ज भी वसूलना होगा।

कंपनी को दी गई है चेतावनी
नगर निगम के अफसरों ने बताया कि कूड़ा कलेक्शन का काम देख रही ईको ग्रीन कंपनी को चेतावनी दी गई है। उससे कहा गया है कि यदि तीन माह के भीतर हालात नहीं सुधरे तो कंपनी के खिलाफ शासन स्तर पर बड़ी कार्रवाई होगी। साथ ही कंपनी को यूजर चार्ज की राशि में इजाफा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अब देखना यह है कि कंपनी इस मामले पर ध्यान देती है या नहीं।

दो करोड़ का लक्ष्य मिलता है 70 लाख

अभी कंपनी की ओर से हर माह 60 से 70 लाख रुपये ही यूजर चार्ज दिया जा रहा है जबकि लक्ष्य 2 करोड़ के आसपास का है। इस बिंदु को भी पार्षदों ने सदन में उठाया था। निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यूजर चार्ज का लक्ष्य 2 करोड़ रुपये प्रति माह हर हालत में हासिल करना होगा। कंपनी के कर्मचारियों को कूड़ा कलेक्ट करने के साथ ही भवन स्वामियों का फीडबैक भी लेना होगा। अगर कोई भवन स्वामी निगेटिव फीडबैक देता है तो उसकी समस्या दूर करने के लिए तत्काल एक्शन लिया जाएगा।

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